भारतीय रेल के लिए Mr. Prabhu लाए हैं ‘त्रिनेत्र’, जाड़े में लेट नहीं होगी ट्रेन !

जाड़े का मौसम आते ही रेल मुसाफिरों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत होती रेल में सफर करना। क्योंकि जैसे ही कोहरा बढ़ता है ट्रेन चलने में लाचार हो जाती है। नतीजा ये होता है कि ट्रेन घंटों-घंटों देरी से चलती हैं। सैंकड़ों ट्रेनें रद्द हो जाती हैं। और ट्रेन के लिए मुसाफिरों का इंतजार घंटों से बढ़कर दिनों का हो जाता है।

लेकिन इसबार ऐसा नहीं होगा। काफी हद तक इस बात की संभावना है कि इसबार जाड़े के मौसम में भी ट्रेनें सही वक्त पर चलेंगी। घने कोहरे के बावजूद भी ट्रेन पटरी पर दौड़ सके इसके लिए रेल मंत्रालय त्रिनेत्र सिस्टम लगाने की तैयारी में है। जिससे घने कोहरे के बावजूद भी ट्रेन के ड्राइवर सामने देख सकेंगे। इसके लिए रेल मंत्रालय ने एक्सप्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट यानी EOI का आमंत्रण किया है।

EOI की अंतिम तारीख 15 जुलाई थी। रेलवे बोर्ड को देश विदेश की 6 कंपनियों से EOI के ऑफर मिल चुके हैं। त्रिनेत्र का ट्रायल इस साल जाड़े के दिनों में लखनऊ-दिल्ली रूट पर 8 जनवरी को लखनऊ मेल में किया जा चुका। और ट्रायल कामयाब भी रहा था।

ये परीक्षण इजरायल की कंपनी के साथ मिलकर किया गया था। जिसकी सफलता के बाद रेलवे ने इसके लिए टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरु की है। उम्मीद की जा रही है कि इस साल जाड़े तक उत्तर भारत की तकरीबन 100 रेलगाड़ियों में इस सिस्टम को लगा दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड के अधिकारी का कहना है कि वो त्रिनेत्र के परीक्षण से संतुष्ट हैं। और इस बात की पूरी उम्मीद है कि इस साल जाड़े में इस सिस्टम का इस्तेमाल गाड़ियों में किया जा सकेगा।
त्रिनेत्र सिस्टम क्या है और कैसे करता है काम ?

  1. त्रिनेत्र रडार आधारित इंफ्रा-रेड और हाई रिजॉल्यूशन वाले कैमरों से लैस एक डिवाइस है। जिसके जरिये घने कोहरे में भी सामने की चीजों को साफ साफ देखा जा सकता है।
  2. रडार की मदद से त्रिनेत्र को अपने सामने और आसपास मौजूद किसी भी तरह की वस्तु या जानवर, आदमी के बारे में घने कोहरे में भी जानकारी मिल जाती है।
  3. डॉप्लर तकनीक पर काम करने वाले रडार सिस्टम से उस वस्तु के गतिशील होने या स्थिर होने का भी पता चलता है
  4. कोहरे में जिस दूसरी तकनीक का इस्तेमाल होता है वो है इंफ्रा-रेड कैमरा। कोहरे में इंफ्रा रेड के जरिये ये खास कैमरा किसी वस्तु के सजीव या निर्जीव होने की जानकारी देता है।
  5. त्रिनेत्र में हाई रिजॉल्यूशन टेरेन कैमरा का इस्तेमाल किया जाता है। इनके जरिये मिलने वाले इनपुट का विश्लेषण कंप्यूटर के जरिये करके इसके स्क्रीन पर फाइनल इमेज भेजी जाती है।

यानि इस तकनीक के आ जाने से जहां मुसाफिरों को आसानी होगी। वहीं ट्रेन के रद्द होने की वजह से रेलवे को जो करोड़ों का नुकसान होता है वो भी नहीं होगा।

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