ट्रेन में हर कमीं के लिए सुरेश प्रभु जिम्मेदार नहीं, तय की गई सभी की जवाबदेही

ट्रेन में सफर करते वक्त अगर मुसाफिर किसी चीज की कमीं महसूस कर रहे हैं तो इसके लिए रेल मंत्री जिम्मेदार नहीं होंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि रेल मंत्रालय ने जरुरी सुविधाओं की जवाबदेही तय कर दी है। जिसमें कहा गया है कि ट्रेन में दी जाने वाली सभी सुविधाओं के लिए ट्रेन सुपरिटेंडेंट जवाबदेह होगा न कि रेलमंत्री। फिलहाल इस नई व्यवस्था को केवल राजधानी ट्रेनों में लागू किया जा रहा है। इसपर मिलनेवाले यात्रियों के फीडबैक के बाद इसे दूसरी ट्रेनों में लागू करने पर विचार किया जाएगा।

रेल मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि ट्रेन सुपरिटेंडेंट रेलगाड़ी में मौजूद सभी सुविधाओं को सही तरीके से मुहैया कराने के लिए जवाबदेह होगा। अगर गाड़ी में किसी तरह की सुविधा की कमी है तो यात्री ट्रेन सुपरिटेंडेंट को शिकायत कर सकते हैं। इसके लिए रेलगाड़ी में ट्रेन सुपरिटेंडेंट का फोन नंबर लगाया जाएगा। ट्रेन पर मौजूद सभी रेल कर्मचारी और बाहरी एजेंसीज के सभी सुपरवायजर ट्रेन सुपरिटेंडेंट को रिपोर्ट करेंगे। ऑनबोर्ड सर्विसेज का पूरा कंट्रोल ट्रेन सुपरिटेंडेंट के हाथों में होगा।

ट्रेन के रखरखाव में शामिल हर विभाग के बीच तालमेल के लिए रेल मंत्रालय की तरफ से साफ किया गया है कि कैरिज एंड वैगन डिपार्टमेंट और इलेक्ट्रिकल डिपार्टमेंट के इंचार्ज अब असिस्टेंट ट्रेन सुपरिटेंडेंट यानी एटीएस के नाम से जाने जाएंगे। ये दोनों अधिकारी ट्रेन सुपरिटेंडेंट के अधीन होंगे और ट्रेन में सुविधाओं को बेहतर करने में मदद करेंगे। अलग अलग रेलवे जोनों को टीएस और एटीएस के कामकाज का बंटवारा करने के निर्देश दिये गए हैं।
फिलहाल इस व्यवस्था के पायलट प्रोजेक्ट के लिए दिल्ली डिवीजन के सीनियर डीसीएम को इन ट्रेनों का प्रोजेक्ट मैनेजर बनाया गया है। ये रेल अधिकारी निजामुद्दीन, नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली से चलने वाली या आने वाली सभी राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों की सुविधाओं की मॉनिटरिंग करेगा।

पानी,एसी, कंबल चादर, मोबाइल चार्जर, खानापीना टाइम टेबल जैसी तमाम चीजों के लिए ट्रेन सुपरिटेंडेंट के लिए प्रोडक्ट मैनेजर सिंगल विंडो सिस्टम की तरह काम करेगा। इस पूरे सिस्टम में मॉनीटरिंग और व्यवस्था के लिए रेल मंत्रालय ने क्रिस CRIS को एक मोबाइल एप बनाने का भी आदेश दिया है।

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