SC का सरकार से सवाल ‘पुराने नोट दोबारा जमा करवाने का मौका क्यों नहीं मिला?’

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि जो लोग प्रतिबंधित 500 और 1000 रुपये के नोट नहीं बदल सके हैं और जिन के पास इसकी वाजिब वजह है उन्हें दोबारा इसे बदलने का मौका क्यों नहीं दिया गया? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का वक्त दिया है। दरअसल केंद्र सरकार ने जब 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट को अमान्य करार दे दिया तो इसे बैंकों में जमा करवाने के लिए 31 दिसंबर तक की समय सीमा दी गई थी।

इस समय सीमा के बाद लोग इस आरबीआई के ब्रांच में जमा करवा सकते थे। लेकिन रिजर्व बैंक में 31 दिसंबर के बाद पुराने नोट जमा करवाने के लिए वजह बताने की शर्त रख दी गई थी। लोगों को ये बताना था कि 31 दिसंबर 2016 तक पुराने नोट बैंकों में क्यों नहीं जमा करवाया गया। एनआरआई के लिए नोट बदलने की सीमा 30 जुलाई है। जबकि बैंक 20 जुलाई तक आरबीआई में पुराने नोट जमा करवा सकते हैं।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दलील दी है कि रिजर्व बैंक में 31 मार्च 2017 तक केवल उन लोगों के नोट जमा हो रहे थे जो नोटबंदी के दौरान देश से बाहर थे। याचिकाकर्ता ने रिजर्व बैंक और मोदी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है।

पुराने नोट जमा करवाने की समय सीमा खत्म होने के बाद की ऐसे मामले सामने आए थे जिसमें लोगों ने किसी न किसी वजह से 31 दिसंबर तक पुराने नोट बैकों में जमा नहीं करवाए थे।

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