बहुविवाह-हलाला पर जल्द सुनवाई नहीं- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली:  बहुविवाह और हलाला पर जल्द सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की थी कि इस मामले की सुनवाई गर्मी की छुट्टियों में की जाए। जिस तरह से तीन तलाक के मामले में सुनवाई की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बहुविवाह और हलाल को असंवैधानिक करार देने की मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1973 की धारा 2 को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए। क्योंकि यह बहुविवाह और निकाह हलाला को मान्यता देता है।

याचिका में ये भी कहा गया है कि ट्रिपल तलाक आईपीसी की धारा 498A के तहत क्रूरता है। निकाह हलाला आईपीसी की धारा 375 के तहत बलात्कार है और बहुविवाह आईपीसी की धारा 494 के तहत एक अपराध है। याचिका में मांग की गई है कि आईपीसी, 1860 के प्रावधान सभी भारतीय नागरिकों पर बराबरी से लागू हों।

याचिका में उस हालात के बारे में भी बताया गया है कि कुरान में क्यों बहुविवाह की इजाजत दी गई। याचिका के मुताबिक इसकी इजाजत इसलिए दी गई ताकि उन महिलाओं और बच्चों की स्थिति सुधारी जा सके, जो उस समय लगातार होने वाले युद्ध के बाद बच गए थे और बेसहारा थे। इसका मतलब ये कदापि नहीं है कि आज भी मुसलमानों को एक से अधिक महिला से निकाह करने की इजाजत दी दी गई।

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