सुप्रीम कोर्ट के जजों की प्रेस कांफ्रेंस पर किसने क्या कहा?

नई दिल्ली:  12 दिसंबर 2018 का शुक्रवार के दिन को कोई न्यायपालिका के लिए काला दिन बता रहा है तो किसी ने इसे बेहद ही दुर्भाग्यपूर्ण बताया। सुप्रीम कोर्ट के चार जज जिनमें जस्टिस जे. चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसेफ ने 7 पन्नों की चिट्टी मीडिया के सामने रखी। यो वो चिट्ठी थी जिसे इन जजों ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को तकरीबन दो महीने पहले लिखी थी। चारों वर्तमान जजों ने जो बातें कही उसका मतलब ये था कि देश में लोकतंत्र खतरे में है और सुप्रीम कोर्ट की साख खतरे में है। जजों ने जिस तरह से प्रेस कांफ्रेंस कर न्यायपालिका के भीतर की बात को सार्वजनिक मंच पर उठाया उसके बाद तमाम नेताओं और वरिष्ठ वकीलों की तरफ से बयान आ रहे हैं। आईये जानते हैं किसने क्या कहा

रविशंकर प्रसाद–  सबसे पहले सरकार की ही बात कर लेते हैं। कानून मंत्री  रविशंकर प्रसाद ने कहा ये न्यायपालिका के भीतर का मामला है। सरकार का इससे कुछ भी लेना देना नहीं है। उम्मीद है मुख्य न्यायाधीश जल्द इस मामले को सुलझा लेंगे।

सलमान खुर्शीद, कांग्रेस नेता, वरिष्ठ वकील– ये सब सुनकर चिंता होती है। मैं उम्मीद करता हूं वो लोग आपस में बैठकर इसका कोई समाधान निकालेंगे। ये ऐसा मुद्दा नहीं है जिससे कोर्ट का कोई नुकसान होना चाहिए।

सुब्रमण्यम स्वामी, बीजेपी नेता, वरिष्ठ वकील– हम उनकी आलोचना नहीं कर सकते हैं। ये चारों लोग ऐसे जिन्होंने अपने इस करियर के लिए बहुत कुछ गंवाया है। हमें उनका सम्मान करना चाहिए। पीएम को ये सुनिश्चित करना चाहिए कि ये चारों जज और चीफ जस्टिस इस मुद्दे पर एकमत हो जाएं।

सोमनाथ चटर्जी, पूर्व लोकसभा स्पीकर– जजों को अपना झगड़ा आपस में ही सुलझा लेना चाहिए था। मीडिया में आकर इस तरह की बयानबाजी सही नहीं है।

उज्जवल निकम, वरिष्ठ वकील– आज का प्रेस कांफ्रेंस एक गलत मिसाल साबित हो सकता है। ये न्यायपालिका के इतिहास का काला दिन की तरह है। इसके बाद हर कोई न्याय आदेश को संदेह की दृष्टि से देखेंगे। हर फैसले पर सवाल उठाए जाएंगे।

ममता बनर्जी, सीएम, पश्चिम बंगाल– सुप्रीम कोर्ट के जजों को जिस तरह से मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखनी पड़ी उससे काफी दुखी हूं। न्यायपालिका और मीडिया लोकतंत्र के स्तंभ हैं। इनमें सरकार का हस्तक्षेप लोकतंत्र के लिए हानिकारक है।

प्रशांत भूषण, वरिष्ठ वकील– सीजेआई अपने पद का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। चीफ जस्टिस बहुत ही बुद्धिमानी से अपने पावर का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसलिए ये बेमिसाल कदम है।

अन्ना हजारे, समाजसेवी– सुप्रीम कोर्ट के जजों ने जिस तरह से जीफ जस्टिस पर आरोप लगाए और अपनी बात मीडिया में रखी वो बहुत ही गंभीर बात है। जजों ने जिस तरह के आरोप लगाए हैं उससे तो देश का लोकतंत्र खतरे में है।

Loading...