सुप्रीम कोर्ट से निराश महिला ने भगवान से कहा ‘जन्म लेते ही मेरा बच्चा मर जाए’

नई दिल्ली: मुंबई की एक महिला ने सुप्रीम कोर्ट से 27 हफ्ते से गर्भ में पल रहे अपने बच्चे के अबॉर्शन की इजाजत मांगी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ये कहकर महिला को अबॉर्शन की इजाजत नहीं दी कि बच्चे के जिंदा बचने की उम्मीद है। इसके बाद निराश महिला ने कहा काश उसका बच्चा जन्म लेते ही मर जाए।

दरअसल महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे को एक रेयर बीमारी है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक महिला के गर्भ में पल रहा बच्चा एरनाल्ड चेयरी टाइप-2 सिंड्रोम से पीड़ित है। इस बीमारी में बच्चे का ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाता है। जिसकी वजह से बच्चे की आगे की जिंदगी काफी कठिन होती है। इसे रेयर डिजीज माना जाता है। खासबात ये है कि इस महिला के 27 साल के भाई को भी यही बीमारी है।

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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से महिला ने कहा सितंबर में उसे प्रेग्नेंसी का पता चला। जिसके बाद महिला काफी खुश हुई। महिला ने गर्भ में पल रहे बच्चे की देखभाल और अपना ध्यान रखने के लिए नौकरी छोड़ दी। महिला का पति एक कंपनी में एचआर मैनेजर है। महिला ने कहा मैं तीन साल से इस दिन का इंतजार कर रही थी। लेकिन अब चाहती हूं कि जन्म लेते ही मेरा बच्चा मर जाए।

महिला ने अब जीफ जस्टिस से अपनी आखिरी उम्मीद रखी है। महिला ने कहा वो चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर अबॉर्शन की इजाजत मांगेगी। बच्चे के एब्नॉर्मल होने की जानकारी प्रेग्नेंसी के 6 हफ्ते बाद सोनोग्राफी रिपोर्ट में मिली। उस वक्त डॉक्टर ने उसे कुछ नहीं बताया और अगले महीने दोबारा जांच कराने को कहा। महिला ने कहा प्राइवेट डॉक्टर से जांच करवाने के बाद उसे बच्चे की बीमारी के बारे में जानकारी दी।

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