तीन तलाक पर 6 महीने के लिए रोक, संसद बनाए कानून- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ना तो तीन तलाक को खारिज किया है और ना ही उसी सही माना है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तीन तलाक पर 6 महीने के लिए रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले पर 6 महीने में संसद कानून बनाए।

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के संवैधानिक पीठ में 11 मई को सुनवाई शुरु हुई थी। इस बेंच अध्यक्षता चीफ जस्टिस कर रहे थे। तीन तलाक पर पांच जजों की बेंच सुनवाई कर रही थी। ये सभी जज अलग अलग पांच धर्म से थे। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर रोजाना सुनवाई की गई। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि केवल तीन तलाक पर ही सुनवाई होगी। अगर जरुरत हुई तो निकाह हलाला पर सुनवाई की जा सकती है। लेकिन संवैधानिक पीठ में पुरुषों के बहुविवाह पर सुनवाई नहीं होगी।

सुप्रीम कोर्ट में इससे पहले की सुनवाई में तीन तलाक पर सभी पक्षों की राय मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट सबसे पहले ये तय करेगा कि क्या तीन तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा है। क्या तीन तलाक धर्म का अभिन्न हिस्सा है। और अगर इसे हटा दिया जाए तो इस्लाम के कोई मायने नहीं रह जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही साफ कर दिया था कि वो केवल तीन तलाक पर सुनवाई करेगा। और जरुरत पड़ने पर निकाह हलाला के मुद्दे पर सुनवाई करेगा। यहां ये साफ कर देना होगा कि कॉमन सिविल कोड का मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने नहीं है।

तीन तलाक का मुद्दा तब जोर पकड़ा जब उत्तराखंड के काशीपुर की शायरा बानो ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर तीन तलाक और निकाह हलाला के चलन को चुनौती दी थी। शायरा बानो ने मुस्लिम पुरुषों के बहुविवाद को भी चुनौती दी थी।

शायरा बानो ने अपनी याचिका में डिसलूशन ऑफ मुस्लिम मैरिजेज ऐक्ट को चुनौती देते हुए कहा था कि मुस्लिम महिलाओं को द्वि विवाह से बचाने में ये विफल रहा है। शायरा ने मुस्लिम पर्सनल लॉ में महिलाओं के साथ भेदभाव और पहली पत्नी के रहते हुए मुसलमान पुरुषों की दूसरी शादी के मुद्दे पर कोर्ट से विचार करने को कहा था।

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