राम मंदिर पर दोनों पक्ष बनाएं सहमति, अगर नाकाम रहे तो फिर हम हैं- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर गंभीर टिप्पणी की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राम मंदिर धर्म और आस्था से जुड़ा मामला है। इस मामले को दोनों पक्ष कोर्ट के बाहर आपसी सहमति से सुलझाएं। कोर्ट ने आगे कहा अगर इसमें कोई रास्ता नहीं निकलता है तो फिर हम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर दोनों पक्ष चाहें तो सुप्रीम कोर्ट के जज मध्यस्थता कर सकते हैं।




बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ये टिप्पणी की। इस मामले पर अगली सुनवाई 31 मार्च को होगी। इस मामले पर याचिका दाखिल करनेवाले सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मेरा निजी विचार ये है कि चुकी राम का जन्म उस जगह पर हुआ है इसलिए राम मंदिर तो उसी जगह पर बनना चाहिए। लेकिन मस्जिद में नमाज पढ़ा जाता है तो नमाज किसी भी जगह पर पढ़ा जा सकता है। तो सरयू नदी के उस पार मस्जिद बना दिया जाए जहां वो नमाज पढ़ें और राम जन्म भूमि की सारी जमीन राम मंदिर बनाने के लिए दे दिया जाए।

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सुब्रमण्यम स्वामी ने सऊदी अरब का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से सऊदी अरब में कई बार हुआ है कि किसी सड़क को बनाने या किसी और वजह से वहां मस्जिद को तोड़कर उसे दूसरी जगह बना दिया जाता है। तो उसी तरह से यहां भी किया जा सकता है। लोग सड़क पर भी नमाज पढ़ते हैं।

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