सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाएं कर सकेंगी प्रवेश, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली:    सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश पर बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सबरीमाला में महिलाओं को भी प्रवेश मिले। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कोर्ट में हर उम्र की महिलाएं जा सकेंगी। सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाले 53 साल पुराने कानून को असंवैधानिक करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि महिलाएं अध्यात्म और दिव्यता की खोज में बराबर की हिस्सेदार हैं। बनी बनाई मान्यताएं इसके आड़े नहीं आनी चाहिए। महिलाएं पुरुषों के समान हैं, समाज को अपनी सोच में बदलाव लाना होगा।

पितृसत्तात्मक सोच आध्यात्मिक मामलों में बाधक नहीं बननी चाहिए। हर धर्म ईश्वर तक पहुंचने का जरिया है। कुछ लोगों को किसी धार्मिक प्रक्रिया से बाहर रखना सही नहीं है। अयप्पा के अनुयायी अगल धार्मिक मत नहीं है। ये हिंदू धर्म का ही हिस्सा है। धर्म के पालन का अधिकार पुरुष और महिला को एक समान है। अनुच्छेद में दी गई नैतिकता की शर्त इसमें आड़े नहीं आती।

क्या है मामला?

केरल के सबरीमाला मंदिर में विराजमान भगवान अयप्पा को ब्रह्मचारी माना जाता है। इसके साथ सबरीमाला मंदिर जाने से पहले 41 देन के कठोर व्रत का नियम है। मासिक धर्म के चलते युवा महिलाएं लगातार 41 दिनों तक व्रत नहीं कर सकतीं। इसलिए 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में आने की इजाजत नहीं दी गई है।

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