यूपी में 325 सीट जीतने में बीजेपी के इस ‘चाणक्य’ ने पर्दे के पीछे से निभाई अहम भूमिका

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अकेले 312 सीट जीती । सहयोगियों को साथ मिलाकर उसके सीटों का आंकड़ा 325 पहुंच गया। इस प्रचंड जीत के पीछे कई चेहरों ने अपनी अपनी तरफ से मेहनत की थी। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने तो इसकी रणनीति तैयार की ही थी लेकिन एक चेहरा ऐसा था जो पर्दे के पीछे से बीजेपी को इस प्रचंड बहुमत की तरफ बढ़ने के लिए मार्ग प्रशस्त कर रहा था।

सुनील बंसल पर्दे के पीछे के उसी कलाकार का नाम है जिसने बीजेपी को शहर से निकालकर गांव तक पहुंचाया और कार्यकर्ताओं की एक नई पलटन तैयार की। जिसकी पहुंच ग्रामीण इलाकों तक थी। सुनील बंसल आरएसएस के छात्र संगठन एबीवीपी के राष्ट्रीय सह-संगठन मंत्री रह चुके हैं। मौजूदा वक्त में बंसल प्रदेश में बीजेपी के संगठन महामंत्री हैं।

बंसल ने 2014 के लोकसभा चुनाव में भी अमित शाह के साथ मिलकर पार्टी की जीत की रणनीति तैयार की थी। जिसके बाद बीजेपी और उसकी सहयोगी ने 80 में से 73 सीटें जीत ली थी। बंसल ने यूपी विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए कार्यकर्ताओं पर भरोसा किया। युवाओं पर नजर रखने के लिए सोशल मीडिया टीम पर नजर रखने वाले सुनील बंसल ने न केवल यूपी में जतीय समीकरणों को बेहद नजदीक से समझा बल्कि बूथ लेवल तक दलित, ओबीसी और महिलाओं से कार्यकर्ताओं को सीधे तैर पर जुड़ने के लिए कहा।

यूपी जीतने के लिए बंसल ने सबसे पहले बीजेपी की उस छवि को खत्म किया जिसमें पार्टी को शहरी पार्टी माना जाता था। इसके लिए उन्होंने पार्टी प्रभारी ओम माथुर के साथ मिलकर पार्टी के टिकट पर पंचायत चुनाव लड़वाने की योजना बनाई। हलांकि पार्टी में इस योजना का विरोध भी हुआ। लेकिन दोनों ने किसी तरह से अधिकारियों को अपने विश्वास में ले लिया। पंचायत चुनाव में बीजेपी के खाते में 327 सीट आई। सीटें कुछ खास तो नहीं थीं लेकिन पार्टी की ग्रामीण छवि जरुर बन गई।

बूथ लेवल पर बीजेपी को मजबूत करने के लिए बंसल ने कमिटी बनाई। और खुद उसकी कमान संभाली। इसके बलबूते राज्य के 1 लाख 47 हजार बूथों में से 1 लाख 8 हजार बूथों पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रभावी मौजूदगी दर्ज करवाई।

प्रदेश के जातिगत आंकड़ों और समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बंसल ने हिंदुओं को जिम्मेदारी देने की शुरुआत की। मायावती के दलित और मुस्लिम वोटबैंक के एजेंडे पर दांव चलते हुए बंसल ने हिंदुओं को प्रमुख जिम्मेदारी दी। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हिंदू खुद को अलग थलग महसूस न करें।

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