लोकतंत्र बचाओ मार्च में सोनिया का पीएम मोदी पर वार

लोकतंत्र बचाओ मार्च में सोनिया का पीएम मोदी पर वार

  • सोनिया, राहुल, मनमोहन ने दी गिरफ्तारी

संसद के भीतर अगस्ता वेस्टलैंड पर घमासान मचा हुआ है। संसद के बाहर सड़क पर कांग्रसी NDA सरकार के खिलाफ लामबंद हैं। जंतर मंतर पर सोनिया से लेकर राहुल और पूर्व पीएम मनमोहन सिंह यानि कहा जाए तो हर स्तर और हर पीढ़ी के कांग्रेसी मौजूद थे। इस मंच से उन मुद्दों को लेकर मोदी सरकार पर हमला किया गया जिससे ज्यादा से ज्यादा जनता का सरोकार जुड़ा है।

राहुल ने अपने भाषण में सबकुछ कहा लेकिन जंतर मंतर पर अगस्ता वेस्टलैंड का जिक्र नहीं किया। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह ने भी काफी कुछ कहा लेकिन उन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड पर कुछ नहीं कहा। उसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी अपने भाषण में अगस्ता वेस्टलैंड का जिक्र नहीं किया। बल्की सोनिया के निशाने पर संघ और मोदी सरकार की नाकामी रही।

सोनिया गांधी ने संघ पर निशाना साधते हुए कहा की नागपुर के ईशारे पर केंद्र सरकार काम कर रही है। सोनिया ने कहा कि मौजूदा केंद्र सरकार से किसान से लेकर छात्र तक परेशान हैं। इशारों –इशारों में सोनिया ने जेएनयू का भी जिक्र कर दिया। उन्होंने कहा की जो केंद्र सरकार की हां में हां नहीं मिलाता उन्हें ये सरकार देशद्रोही करार दे देती है। महंगाई से लोग परेशान हैं। किसान आत्महत्या कर रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार उसपर खामोश हैं। छात्रों पर अत्याचार हो रहा है। उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को मोदी सरकार ने गिराने की कोशिश की। जो की लोकतंत्र की हत्या है। केंद्र सरकार धनबल और बाहुबल का इस्तेमाल कर एक-एक कर कांग्रेसी सरकार को गिराने की साजिश कर रही है। मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए सोनिया ने कहा की अगर जरुरत पड़ी तो हम हर तरह की कुर्बानी देंगे। आगे सोनिया ने कहा कि जिस दिन पानी सिर से उपर चला जाएगा उस दिन भारत के लोग बड़े से बड़े लोगों को भी पानी पिला देते हैं।

दरअसल कांग्रेस को ये एहसास है कि संसद के भीतर उसकी हालत काफी पतली और कमजोर है। इसलिए संसद के भीतर मजबूत होने के लिए जरुरी है कि सड़क पर खुद को मजबूत किया जाए। शायद यही वजह है कि उस वक्त जबकी संसद का सत्र चल रहा है तब कांग्रेसी नेता जंतर मंतर पर लोकतंत्र बचाने निकले। खास बात ये रही की कांग्रेस के उस मार्च में मनमोहन सिंह की तरह वोयोवृद्ध नेता से लेकर राहुल गांधी की तरह युवा नेता भी शामिल थे। यानि कांग्रेस अब ये मान चुकी है कि अगर जनता की नजर में खुद को मजबूत बनाना है तो जरुरी है कि हर पीढ़ी के नेता को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए।

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