केजरीवाल की पत्नी के नाम खत ‘बहन जी अरविंद जी को समझ और सद्बुद्धि दें’

दिल्ली: दिल्ली की महिलाएं सीएम अरविंद केजरीवाल की पत्नी सुनिता से मिलने उनके घर पहुंची। लेकिन उन्हें निराश होना पड़ा क्योंकि दरबान ने कहा वो घर पर नहीं हैं। महिलाएं दिल्ली में बेधड़क खुल रहे शराब के ठेकों की शिकायत करने पहुंची थीं। लेकिन जब सुनिता घर पर नहीं मिलीं तो महिलाएं वहां मौजूद स्टाफ को चिट्ठी सौंप कर वापस लौट गईं।

नमस्ते बहन जी,

हम दिल्ली के अलग अलग हिस्सों से आई आम औरते हैं। बहुत परेशानी में हैं। डरे सहमे और घबराए हुए हैं। डर हमें अपनी सम्मान और सुरक्षा के लिए है। घबराहट अपने बच्चों के भविष्य के लिए है और सहमे हुए इसलिए हैं कि हमारा जीना दूभर हो गया है। हम लोग अपने अपने इलाकों में खुले शराब के ठेकों से त्रस्त हैं। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद भी दिल्ली सरकार ने हमारे इलाके में शराब का ठेका खोल दिया है। जिसके कारण छीनाझपटी, छेड़खानी, अश्लील हरकतों से लेकर मारपीट तक की घटनाएं आम बात हो गई हैं।

बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए अलग अलग रास्ता लेना पड़ता है। शाम होते ही गली से गुजरना नामुमकिन हो गया है। कुछ इलकों में तो दारू बीयर की बोतलें घरों के पास फेंकी मिलती हैं। हममे से कई बहनों के पति रात को नशे में घर लौटते हैं, मारपीट गाली गलौज करते हैं।बता नहीं सकते किस-किस तरह की समस्याओं का सामना हमें करना पड़ता है।

अपनी परेशानी को लेकर हमने सभी दरवाजे खटखटा लिये। विधायक अधिकारी से लेकर बड़े नेता मंत्रियों तक सबके आगे गुहार लगाई। लेकिन हमारी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं मिली, समस्याओं का कोई भी समाधान नहीं मिला। आपसे मिलने का कारण ये है कि आपमें हमें एक उम्मीद दिखी। आप भी हमारी तरह एक सरल महिला हैं, गृहणी हैं। आपका भी एक परिवार है, बच्चे हैं आप शायद हम महिलाओं का दर्द समझ पाएंगी।

हमारा बस एक निवेदन है आपसे, यदि संभव हो तो अरविंद जी से हमारी पैरवी कर दें। शायद वो हमारी परेशानी नहीं समझ पा रहे। वरना डेढ़ साल में ही दिल्ली में 399 शराब के नए लाइसेंस नहीं बांटते। शायद वो समझ नहीं पा रहे कि शराब के नशे को धंधा बनाकर पैसे कमाना कोई अच्छी बात नहीं है। आप बात करेंगी तो जरुर समझेंगे।

हमने तो अरविंद जी की बातों पर भरोसा करके ही उन्हें वोट दिया था। उन्होंने कहा था कि हमसे पूछे बिना दारू का कोई ठेका नहीं खुलेगा। लेकिन ठीक इसके उलटा हुआ है हमारे इलाके में। स्वराज का वादा किया गया था लेकिन शराब का ठेका थमा दिया गया है। शायद आपके समझाने से हमारे इलाके में खुला दारु का ठेका बंद कर दिया जाए। आपसे उम्मीद है आप ही अरविंद जी को कुछ समझ और सद्बुद्धि दे सकती हैं।

स्नेहपूर्ण अभिवादन
आपकी बहनें

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