गेहूं की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं ‘श्रीविधि’ जानिये इस तकनीक से कैसे करें खेती

कुमार गौरव/पूर्णिया
जिले में श्रीविधि से गेहूं की खेती कारगर साबित हो रही है। अगर तुलना करें तो इसमें परंपरागत खेती से बुआई का खर्च चौथाई से भी कम हो रहा है और उपज डेढ़ गुना मिल रही है लेकिन इस खेती में बीज को उपचारित कर बुआई की विधि थोड़ी अलग है। रसायनिक खादों के इस्तेमाल से मुक्ति मिल रही है। अब तो किसान बुआई के लिए कतार से कतार और पौधे से पौधे के बीच एक निश्चित दूरी रखने के लिए कोनोवीडर मशीन की सहायता ले रहे हैं। यह खेती छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। जिले में इस विधि के प्रति किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विभाग की ओर से विशेष पहल की जा रही है।

खेत को ऐसे करें तैयार 
खेत की तैयारी के लिए सामान्य गेहूं की खेती की तरह ही करते हैं। इसके बाद गोबर खाद 20 क्विंटल या वर्मी कम्पोस्ट 04 क्विंटल प्रति एकड़ प्रयोग करना चाहिए। यदि खेत में पर्याप्त नमी नहीं है तो जुताई से पहले एक सिंचाई अवश्य करनी चाहिए। अंतिम जुताई के पहले 27 किलो डीएपी और 13.05 किलो पोटाश प्रति एकड़ खेत में छिड़काव कर मिट्‌टी के साथ अच्छी तरह से हल की मदद से मिला लेना चाहिए।

किसान अपने खेतों की मिट्‌टी की जांच कराने के बाद ही उर्वरक का प्रयोग करें। बुआई से 15-20 दिन बाद सिंचाई करना जरूरी है। क्योंकि नई जड़ें बननी शुरू हो जाती हैं। इसके बाद खरपतवार निकाल दें। 35 से 40 दिन बाद दूसरी सिंचाई और 55 से 60 दिन बाद तीसरी सिंचाई तथा अगली सिंचाई 60, 80 और 100 दिनों के अंतराल पर की जाती है। बुआई के 40 दिनों के बाद तीसरी सिंचाई के तुरंत बाद 15 किलो यूरिया, 13 किलो पोटाश प्रति एकड़ की दर से खेतों में डालें। दो तीन दिनों के बाद कोनोवीडर से खर पतवार निकाल देना चाहिए। यह ध्यान रखें कि बाली में दाना बनने के समय पानी की कमी नहीं हो।

श्री विधि के लिए बीज उपचार की विधि 
बीज उपचार के बारे जिला कृषि समन्वयक सुनील कुमार झा कहते हैं कि दस किलो बीज में से मिट्‌टी कंकड़ और खराब बीज को छांट लें। 20 लीटर पानी को बर्तन में गुनगुना करें (60 डिग्री सेंटीग्रेड) छांटे हुए बीज को गुनगुने पानी में डाल दें। इस पानी में पांच किलो वर्मी कम्पोस्ट, 04 किलो गुड़, 04 लीटर गोमूत्र मिलाकर आठ घंटे तक छोड़ दें। आठ घंटे के बाद इस मिश्रण को एक कपड़े से छान लें। इसके बाद बीज में बैविस्टीन 20 ग्राम मिलाकर 12 घंटे के लिए अंकुरित होने के लिए गीले कपड़े में बांधकर छोड़ दें। इसके बाद अंकुरित बीज को बोने के लिए इस्तेमाल करें।

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