वक्त आ गया है जब धोनी को वनडे क्रिकट से भी रिटायर हो जाना चाहिए?

नई दिल्ली:  किस्मत के महाधनी कहे जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में भारतीय क्रिकेट टीम ने एक से बढ़कर एक उपलब्धियां हासिल की। कप्तानी में जहां इस क्रिकेटर ने भारतीय टीम को वनडे और टी-20 वर्ल्ड कप में चैंपियन बनाया तो बल्लेबाजी में भी कई मौकों पर महेंद्र सिंह धोनी ने दे दनादन रन बनाकर टीम को जीत दिलाई। कहते हैं हर क्रिकेटर के करियर में एक ऐसा दौर आता है जब वो अपने वास्तविक लय को हासिल करने के लिए संघर्ष करते दिखता है।

टेस्ट मैचों में जब माही को लगा कि अब उन्हें क्रिकेट के असली फॉर्मेट से रिटायर हो जाना चाहिए तो उन्होंने इसमें देरी नहीं की। टीम में विराट कोहली का कद जिस तरह लगातार बढ़ता जा रहा था उसे शायद देखकर धोनी ने वनडे की भी कप्तानी छोड़ दी, और अब ऐसा वक्त आ गया है जिसे देखकर लग रहा है कि धोनी को एक खिलाड़ी के तौर पर भी इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह देना चाहिए।

वेस्टइंडीज के खिलाफ चौथे वनडे में जिस तरह धोनी ने आपार अनुभव के बावजूद हाफसेंचुरी पूरी करने के लिए 108 गेंदों का सहारा लिया उससे उनकी काबिलयत पर सवाल उठना भी लाजिमी हो गया है। माही के करियर की ये सबसे धीमी हाफ सेंचुरी रही। सिर्फ 189 रन पर सिमटने के बावजूद इंडीज ने भारतीय टीम को हरा दिया। भारतीय टीम की हार के सबसे बड़े विलन धोनी ही कहे जा सकते हैं।

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