फंस गए नेताजी! शिवपाल ने कैबिनेट और प्रदेश अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

लखनऊ:  गुरुवार को एक बार ये लग रहा था कि मुलायम सिंह यादव के घर में मचा घमासान शांत हो जाएगा। लेकिन दिन के बाद जब रात हुई तो झगड़ा खत्म होने के बजाय बढ़ गया। क्योंकि मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव ने कैबिनेट और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। शिवपाल यादव ने ये इस्तीफा सीएम अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद दी। दोनों के बीच तकरीबन 20 मिनट तक मुलाकात हुई, बातचीत हुई लेकिन इस दौरान दोनों के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हो सके। क्योंकि इस्तीफे के बाद शिवपाल यादव ने कहा कि जहां सम्मान नहीं है वहां काम नहीं कर सकता। कहा जा रहा है कि 20 मिनट की मुलाकात में दोनों तरफ से एक दूसरे पर आरोप लगाए गए।

इस इस्तीफे के बाद शिवपाल के घर के बाहर समर्थकों की भीड़ जामा है। नारे लग रहे हैं चाचा तुम संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं। इस्तीफे के बाद समाजवादी पार्टी के तकरीबन 20 विधायक उनसे मिलने रात को ही उनके घर पहुंचे। इस्तीफा देने के बाद शिवपाल यादव ने सरकारी गाड़ी छोड़ दी है। शिवपाल यादव के इस्तीफे के पीछे दबाव की राजनीति है या फिर वो सचमुच समाजवादी पार्टी से दूर होना चाहते हैं ये अभी साफ नहीं है। लेकिन सूत्रों के मुताबिक ये बात कही जा रही है कि दिल्ली में जब शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव के बीच मुलाकात हुई तो उसमें मुलायम की तरफ से उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया था।

शिवपाल चाहते थे कि कैबिनेट में उनका पूरा सम्मान लौटाया जाए। यानि उनसे जो मंत्रालय छीने गए हैं वो उन्हें वापस दिये जाएं। इसका साफ मतलब है कि सीएम अखिलेश अपना फैसला पूरी तरह से बदल दें। दूसरी तरफ शिवपाल चाहते थे कि प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर उन्हें काम करने और फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता हो। यानि पार्टी के फैसले से लेकर टिकट बंटवारे तक में अखिलेश का दखल न हो।

शिवपाल की इन मांगों और जरुरत के मुताबिक मुलायम अखिलेश से बात कर चुके थे। लेकिन सीएम अखिलेश अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं थे। दिल्ली से लखनऊ पहुंचने के बाद मुलायम सीधे अखिलेश के घर गए। जहां दोनों के बीच लंबी बातचीत हुई । लेकिन उधर पिता-पुत्र के बीच बातचीत चल रही थी इधर चचा शिवपाल का क्रोध बढ़ रहा था। जिसका नतीजा इस्तीफे के रुप में सामने आया। क्योंकि शिवपाल इसके लिए तैयार नहीं थे कि वो अखिलेश के कैबिनेट में कमजोर मंत्रालय के मुखिया बनकर बैठे रहें।

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