अगर इन 5 राशियों में आप भी शामिल हैं तो शनि की महादशा से आप प्रभावित होंगे

नई दिल्ली: इंसान की कुंडली में कुल नौ ग्रह मौजूद रहते हैं। जिनमें से शनि ग्रह भी एक है। शनि को पापी ग्रह भी कहा जाता है। इसके अलावे राहु और केतु को भी पापी ग्रह कहा जाता है। इसकी वजह ये है कि ये तीनों ग्रह जिस जातक की कुंडली में रहते हैं वहां काफी उथल पुथल होता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक शनि को धीमी चाल वाला ग्रह माना गया है। यही वजह है कि किसी भी राशि में आने बाद कम से कम ढाई साल तक ये रहता है। उस राशि में भी शनि की चाल मंद गति ही होती है। इसलिए जातक पर इसका प्रभाव भी धीरे धीरे दिखता है।

शनि की कुल दशा 19 साल की होती है। अगर उसमें साढ़े साती और दो ढैय्या का समय जोड़ दिया जाए तो इसका कुल समय होता है 31 साल। यानि अगर किसी की कुंडली में शनि की ढैय्या या साढ़ेसाती चल रही है तो इसके समाप्त होने के 31 साल बाद ये फिर से आएगी। शायद इसी वजह से लोग शनि से काफी भयभीत भी रहते हैं। और कम से कम शनि से बचने के उपाय जरुर करते हैं।

शनि कर्मफल दाता माने जाते हैं। जो जातक को उसके बुरे कर्मों का फल वक्त आने पर जरुर देते हैं। अगर आप ये जानने के लिए उत्सुक हैं कि मौजूदा वक्त में किन किन जातक की राशि में शनि का योग बन रहा है तो हम आपको बताते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस समय शनि धनु राशि में है। चुकी शनि जहां विराजमान रहते हैं वहां से उनती तिरछी दृष्टि आगे और पीछे वाले ग्रह पर भी पड़ती है इसलिए शनि की छाया धनु राशि के साथ साथ वृश्चित और मकर राशि पर भी शनि की दृष्टि पड़ रही है। इसके अलावे वृषभ और कन्या पर भी शनि की दृष्टि पड़ रही है। इस तरह से मौजूदा समय में धनु, वृश्चिक और मकर राशि में शनि की साढ़ेसाती चल रही है। जबकि वृषभ और कन्या राशि में ढैय्या चल रही है।

अब अगर आप भी इस राशि के जातक हैं तो निश्चित तौर पर शनि के प्रकोप से बचने के लिए आप उपाय भी करना चाहेंगे। तो शनि का साढ़ेसाती या ढैय्या से बचने के लिए शनि बीज मंत्र ऊं प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: का जाप रोजाना 108 बार जरुर करें। साथ ही शनि श्रोत का जाप भी करें। नमस्ते कोण संस्थाय पिंगलाय नमोस्तुते। नमस्ते विष्णु रूपाय कृष्णाय च नमोस्तुते। नमस्ते रौद्र देहाय नमस्ते कालकायजे। नमस्ते यम संज्ञाय शनैश्चर नमोस्तुते। प्रसादं कुरू देवेश दीनस्य प्राणतस्य च।

काले घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी अंगुठी भी दाएं हाथ की मध्यमा अंगुली में शनिवार के दिन सुबह शनि बीज मंत्र का 108 बार जाप करने के पश्चात धारण कर लें। अंगूठी को शुक्रवार रात को ही सरसों के तेल में डालकर रख दें। शनिवार को अंगुठी का धारण करने पश्चात तेल से दीपक जला दें।

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