दिल्ली सरकार पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाया 25,000 का जुर्माना

दिल्ली: दिल्लीवाले डेंगू और चिकनगुनिया से बीमार हो रहे हैं। अस्पताल में हालात बिगड़े तो सवाल सरकार की तैयारियों पर उठी। सरकार की कोशिश से जनता को राहत मिल नहीं रही थी इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा। लेकिन जब दिल्ली सरकार जवाब देने में नाकाम हो गई तो सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगा दिया।

डेंगू, चिकनगुनिया पर रिपोर्ट सौंपने में नाकाम रहने पर अब दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन 25,000 रुपये का जुर्माना भरेंगे। हलांकी जुर्माने से बचने और हलफनामा दायर करने के लिए स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने सुप्रीम कोर्ट से और 24 घंटे का वक्त मांगा। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए और 24 घंटे का समय देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा लोग मर रहे हैं और आपको वक्त चाहिए।

दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के मरीजों की तादाद लगातार बढ़ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में 26 सितंबर को स्वत: संज्ञान लिया था और दिल्ली सरकार और सिविक एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इस मामले पर केंद्र सरकार ने कहा था कि अगर दिल्ली सरकार सही तरीके से डेंगू और चिकनगुनिया की रोकथाम करने में नाकाम रहती है तो ये काम केंद्र सरकार करेगी।

कोर्ट में दिल्ली सरकार ने दलील दी थी कि अधिकारी उसन नहीं सुनते। सारी फाइलें उप राज्यपाल के पास हैं और अफसर सहयोग नहीं कर रहे। उप राज्यपाल सरकारी कामकाज में अड़ंगा डाल रहे हैं। तब सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा था कि आखिर सरकार ये कैसे कह सकती है कि कोई भी अधिकारी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है।

इसपर कोर्ट ने कहा था दिल्ली के लोगों को इस तरह से नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने सोमवार तक दिल्ली सरकार से उन अधिकारियों के नाम बताने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि सरकार का जवाब बंद लिफाफे में न हो। चुकी आरोप खुली अदालत में लगाए गए हैं इसलिए खुली अदालत में ही जवाब भी दें। लेकिन सरकार तय वक्त में जवाब तैयार नहीं कर सकी। या यूं कहें उन अधिकारियों को नहीं ढूंढ सकी जिन्होंने दिल्ली सरकार का आदेश मानने से इनकार कर दिया था।

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