ट्रंप का खौफ यूं ही बढ़ता रहा तो IT के क्षेत्र में चीन की हो सकती है बल्ले-बल्ले!




नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने जिस तरह की नीति अपनाई है उसके बाद IT क्षेत्र की कई कंपनियां निवेश के लिए नए विकल्प की तलाश कर रही हैं। इनमें भारतीय IT कंपनियां भी शामिल हैं। खासबात ये है कि अमेरिका और यूके के बाद इन कंपनियों की पहली पसंद पड़ोसी देश चीन है। चीन की चांदी इसलिए हो सकती है क्योंकि अमेरिका और यूके दोनों जगह पर संरक्षणवादी सोच बढ़ रही है।

नेशनल असोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर ऐंड सर्विसेज कंपनीज यानि NASSCOM और शंघाई में भारत के वाणिज्य दूतावास ने मिलकर नानचिंग सरकार के साथ जनवरी में एक समारोह का आयोजन किया था। जिसका मकसद चीनी कंपनियों और भारत की आईटी कंपनियों के बीच रिश्ते को बढ़ाना था।
इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में नैसक़ॉम के वैश्विक व्यापार विकास के निदेशक गगन सभरवाल ने बताया ‘चीन और जापान दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और आईटी के क्षेत्र में दूसरी सबसे बड़ी खर्च करने वाले देश हैं। हमें अमेरिका और यूके पर बहुत ज्यादा भरोसा करने के बजाय इन देशों की तरफ रुख करने की जरुरत है।‘

NASSCOM दुनिया की दो मुख्य बाजारों अमेरिका और यूके के बाहर भारतीय आईटी इंडस्ट्री की मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। NASSCOM पिछले दो सालों से चीन में अवसरों पर अध्ययन कर रहा है। सभरवाल ने कहा ‘जब आप चीन जाते हैं तो आपको पता चलता है कि उस भौगोलिक सीमा में निवेश करने वाली हरेक अच्छी कंपनी शानदार कारोबार कर रही है। ऐसा नहीं है कि चीन बाहर से कुछ नहीं खरीदता है। चीन सबसे खरीदता है। लेकिन फर्क ये है कि कि वो उन्हीं प्रॉडक्ट्स को स्वीकार करते हैं जो चीन से बाहर बने हों।‘ उन्होंने कहा कि ‘इंडियन आईटी इंडस्ट्री ने चीन में अच्छी शुरुआत की है।‘

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