नोटबंदी ने इन सेक्टर की रीढ़ तोड़ दी अब नुकसान की भरपाई कैसे होगी?




नई दिल्ली: 8 नवंबर को जो नोटबंदी लागू किया गया था उसे दो महीना पूरा हो चुका है। सरकार ने हालात में सुधार के लिए 50 दिन का वक्त मांगा था। वो समय सीमा भी खत्म हो गई है। इतनी दिन बीत जाने के बाद अब नोटबंदी से नुकसान के आंकड़े सामने आ रहे हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर से लेकर बैंकिंग सेक्टर तक में गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन सरकार अपने आंकड़े में कुछ अलग कहानी पेश कर रही है।

ऑटो मोबाइल सेक्टर, रियल एस्टेट, आरबीआई और एसएमआई के आंकड़ो के मुताबिक सरकार के दावे गलत हैं। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 23 दिसंबर को बैंकों का क्रेडिट ग्रोथ गिरकर 5.1 फीसदी फीसदी पर आ गया। पिछले कई दशक में ये सबसे निम्न स्तर है।

ऑटो सेक्टर का भी यही हाल रहा। सोसायटी ऑफ इंडिया ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के मुताबिक दिसंबर में सेल्स पिछले 16 साल में सबसे नीचे आ गया। सभी कैटेगरी की टोटल सेल में दिसंबर 2000 के बाद सबसे बड़ी गिरावट दिखी। 2000 में सेल्स में 21.81 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। लेकिन नोटबंदी के बाद 18.66 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।

सरकार के नोटबंदी के फैसले के बाद रियल एस्टेट भी रो रहा है। नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि नोटबंदी के चलते रियल एस्टेट में तकरीबन 44 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जिसकी वजह से इस सेक्टर को 2600 करोड़ का नुकसान हुआ है।

देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और एक्सपोर्ट सेक्टर में 40 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी रखने वाले एसएमआई सेक्टर पर भी नोटबंदी की मार पड़ी है। एसएमआई के बिजनेस में गिरावट आने के साथ साथ कई लोगो की नौकरियां भी चली गई। नोटबंदी से एसएमआई सेक्टर में 25 फीसदी की गिरावट आई है। सूत्रों के मुताबिक पिछले 60 दिनों में कांट्रेक्ट वर्कर्स की 25-30 फीसदी नौकरी चली गई।

वहीं ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स ऑर्गनाइजेशन के स्टडी में ये बात सामने आई है कि 35 दिनों में 50 फीसदी रेवेन्यु का नुकसान हुआ है।

सरकार का आंकड़ा कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहा है। सरकार ने हाल ही में 2016-17 के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रखा गया है। सरकार के इस अनुमान पर जानकारो का कहना है कि सीएसओ बिना नोटबंदी के असर को देखे जीडीपी का अनुमान लगा रहा है। जानकार ये भी बता रहे हैं कि नोटबंदी के निगेटिव इम्पैक्ट को देखते हुए ग्रोथ रेट 6 फीसदी के आसपास रह सकती है।

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