पशुपालन घोटाले में आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव दोषी, 3 जनवरी को सजा का एलान

रांची/झारखंड:  पशुपालन घोटाले में रांची की सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालन ने आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को दोषी करार दे दिया है। अब सजा का एलान 3 जनवरी को होगा। कोर्ट का फैसला आने के बाद ही लालू को गिरफ्तार कर लिया गया है। अब वो 3 जनवरी तक जेल में रहेंगे। इस मामले में 22 आरोपी थे। जिनमें से जगन्नाथ मिश्रा, ध्रुव भगत, विद्या सागर निषाद, सरस्वती चंद्र, अजीत चंद्र चौधरी को बरी कर दिया गया है। पेशी के लिए आदालत पहुंचे लालू यादव ने कहा था कि उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। अदालत पर उन्हें पूरा भरोसा है। वो निर्दोष हैं। साथ ही लालू ने कहा कि एक मुर्गी को 9 बार हलाल किया जा रहा है। पशुपालन घोटाले में लालू पर अलग-अलग 6 मामले दर्ज हैं।

सीबीआई अदालत जिस मामले में फैसला सुनाया है वो झारखंड के देवघर ट्रेजरी से जुड़ा है। जहां से 1994 से 1996 के बीच 84.5 लाख रुपये की निकासी की गई थी। लालू उन 22 आरोपियों में से एक हैं जिनके खिलाफ पशुपालन घोटाले में केस चल रहा है। बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा भी इसी मामले में आरोपी हैं।

सौजन्य- एएनआई

रांची में शनिवार को लालू पर फैसला आना है। उससे पहले शुक्रवार को लालू यादव शाम को पटना से रांची के लिए रवाना हुए। उनके साथ उनके बेटे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी हैं। लालू ने कहा तेजस्वी और तेज प्रताप पार्टी को आगे लेकर जाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि लाखों कार्यकर्ता उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि मुश्किल वक्त में भी पार्टी मजबूत बनकर उभरी है। और बीजेपी के खिलाफ उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

पशुपालन घोटाले के ही एक दूसरे मालमे में लालू को पांच साल की जेल और 25 लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई जा चुकी है। लालू को सजा झारखंड के ही चाइबासा ट्रेजरी से 37.5 करोड़ की निकासी से जुड़े मामले में सुनाई गई थी। दिसंबर 2013 में लालू को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी।

2014 में पटना हाईकोर्ट ने लालू के खिलाफ चल रहे दूसरे मामलों पर रोक लगा दी थी। कोर्ट के फैसले में कहा गया था कि चुकी लालू को पशुपालन से जुड़े एक मामले में सजा हो चुकी है इसलिए समान व्यक्ति के खिलाफ समान केस में समान सबूत और समान गवाह के बल पर अलग से मुकदमा नहीं चल सकता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। और पशुपालन से जुड़े हर मामले की अलग अलग सुनवाई के आदेश दिये थे।

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