संसद में GST पर चर्चा, कांग्रेस बोली बीजेपी ने 6 साल में 10 लाख करोड़ का नुकसान कराया

नई दिल्ली: लोकसभा में GST पर चर्चा की जा रही है। इससे जुड़े चार विधेयकों को सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में पेश किया था। चर्चा की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा GST गेमचेंजर की तरह है। उन्होंने बिल के कुछ प्रावधानों का जिक्र भी किया।

बहस की शुरुआत करते हुए जेटली ने कहा GST के तहत खाने-पीने की जरुरी सामानों पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। यानि पहला टैक्स स्लैब शून्य होगा जबकि दूसरा स्लैब 5 फीसदी तीसरा स्लैब 12 और 18 फीसदी का है। वित्त मंत्री ने कहा लग्जरी टैक्स स्लैब को दो भागों में बांटा या है- टैक्स और सेस। इसमें टैक्स की दर 28 फीसदी होगी। जेटली ने कहा मौजूदा वक्त में लग्जरी सामानों पर टैक्स 40 से 65 फीसदी है। लेकिन GST लागू होने के बाद उन सामानों पर 28 फीसदी टैक्स लगेंगे।

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उन्होंने कहा GST लागू करने के बाद शुरुआती पांच साल में जिन राज्यों को नुकसान होगा, उनकी भरपाई केंद्र सरकार करेगी।

बारी जब विपक्ष की आई तो कांग्रेस की तरफ विरप्पा मोइली ने GST पर सवाल उठाते हुए इसके गेमचेंजर होने के दावे को खारिज कर दिया। मोइली ने कहा यह कोई गेमचेंजर नहीं बल्कि बहुत छोटा कदम है। मोइली ने कहा उनकी सरकार GST पर आगे बढ़ना चाह रही थी। लेकिन तब विपक्ष में बैठी बीजेपी ने इसमें रुकावट डाल दी।

मोइली ने सरकार से सवाल किया कि जब GST को 6 साल बाद लागू किया जा रहा है तो इससे हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी है। मोइली ने कहा 2010 में GST लागू नहीं होने की वजह से सालाना 1 से 1.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। अगर कुल नुकसान की बात करें तो देश को तकरीबन 10 लाख करोड़ का नुकसान हो चुका है।

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दरअसल GST का इतिहास काफी पुराना है। टैक्स सुधार को लेकर वाजपेयी सरकार ने ही साल 2000 में एक कमिटी गठित की थी। 2004 में केलकर कमेटी ने GST का सुझाव दिया। 2006 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने GST को अप्रैल 2010 से लागू करने का प्रस्ताव रखा। लेकिन कामयाबी नहीं मिली। फिर अप्रैल 2011 में लागू करने का एलान किया गया। लेकिन बात फिर अटक गई। और अब मई 2017 से इसे लागू करने की बात कही जा रही है।

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