प्रभु जी लोग काफी चिंता में हैं आप भी इस खबर को जरुर पढ़ लें

नई दिल्ली:  भारतीय रेल में परोसे जाने वाले खाने पर सीएजी यानि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने जो रिपोर्ट दी है उसे पढ़कर और उसके बारे में जानकर ट्रेन में सफर करनेवाले यात्रियों की चिंता बढ़ गई है। चिंता ये हो रही है कि एक तो बाजार भाव से ज्यादा पैसे चुकाकर रेलवे में सफर के दौरान खाना खरीदा और फिर अगर उस खाने को खाने के बाद बीमारी का खतरा बढ़ जाए तो यात्रियों के लिए आगे कुआं और पीछे खाई वाली बात हो जाती है। क्योंकि सफर के दौरान ट्रेन का खाना खरीदने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं। आखिर भूखे पेट सफर कैसे तय करें।

सीएजी ने रेलवे के खाने को लेकर जो रिपोर्ट दी है उसके मुताबिक ट्रेन का खाना शुद्धता के पैमाने पर खरा नहीं उतरता है। सीएजी रिपोर्ट में खाने की गुणवत्ता और उसकी शुद्धता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बेस किचन रेलवे स्टेशन से काफी दूर बने होते हैं। जहां बेस किचन होता है वहां किसी तरह का क्वालिटी चेक नहीं होता है। और ना ही क्वालिटी को सुधारने, साफ सफाई और स्वच्छता के पैमाने पर खरा उतरता है।

सीएजी रिपोर्ट में रेलवे में परोसा जाने वाला जनता मील भी सवालों में घिर गया है। जनता मील को रेलवे ने ये कहकर शुरु किया था कि इससे रेलवे में सफर करनेवाले यात्रियों को कम कीमत में अच्छी क्वालिटी का खाना मिलेगा। लेकिन पिछले तीन सालों में जनता मील की क्वालिटी में गिरावट आई है। रेलवे स्टेशनों पर जनता मील इतनी मात्रा में नहीं होता कि उससे सभी यात्रियों की जरुरत पूरी हो सके।

सीएजी की रिपोर्ट में रेलवे में खाने की कीमत को लेकर भी जिक्र किया गया है। इसमें कहा गया है कि रेलवे स्टेशन पहुंचने वाले यात्रियों और रेल में सफर करनेवाले यात्रियों को जो सामान बेचा जाता है उसकी कीमत के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती। ना ही उस खाने का बिल दिया जाता है। जो सामान परोसा जाता है उसकी मात्रा भी कम होती है। साथ ही बाजार भाव से ज्यादा कीमत भी वसूली जाती है।

कहने को रेलवे की तरफ से खाने की शिकायत के लिए शिकायत केंद्र बनाए हैं लेकिन उससे भी शिकायतों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। जबकि शिकायतों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। रेलवे के खाने की क्वालिटी पर सवाल हमेशा उठता रहा है। ऐसा भी नहीं है कि केवल एक्सप्रेस ट्रेनों के खाने की क्वालिटी ही सवालों में है। राजधानी और शताब्दी जैसी ट्रेनों का खाना भी क्वालिटी के मामले में फिसड्डी ही साबित होता है। जबकि खाने की कीमत हर साल बढ़ती जा रही है।

Loading...

Leave a Reply