अखिलेश की तरफ गठबंधन का हाथ बढ़ाना चाह रहे हैं राहुल ?

नई दिल्ली: दिल्ली के तुगलक लेन में बुधवार को हाई प्रोफाइल बैठक चल रही थी। यूपी में कांग्रेस के जितने विधायक हैं वो सब उस बैठक में मौजूद थे। बैठक खुद कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ले रहे थे। उस बैठक में यूपी कांग्रेस के कई और बड़े नेता भी शामिल थे। सूत्रों के मुताबिक विधायकों से राहुल ने यूपी में समाजवादी पार्टी के नेतृत्व पर राय जाननी चाही। राहुल ने विधायकों से पूछ लिया कि मुलायम या अखिलेश में से किसकी छवि बेहतर है?

राहुल का इतना पूछना काफी थी। क्योंकि इस एक सवाल ने कई संभावनाओं को जन्म दे दिया। ईशारा गठबंधन की तरफ भी किया जा रहा है। क्योंकि अखिलेश पहले ही राहुल को अच्छा इंसान बता चुके हैं। वो यहां तक कह चुके हैं कि अगर राहुल बराबर यूपी आते रहे तो उनसे दोस्ती हो जाएगी। दूसती तरफ राहुल अपने विधायकों से ये पूछ रहे हैं कि मुलायम और अखिलेश में से अच्छी छवि किसकी है। आखिर क्या मायने निकाला जाए इसका?

दरअसल समाजवादी पार्टी के भीतर मचे घमासान ने सियासी समीकरण बदल दिये हैं। कांग्रेस ऊपर से भले ही ये ना माने लेकिन ऑफ द कैमरा कांग्रेसी नेता भी मानते हैं कि यूपी में सपा के दंगल के बाद चुनावी समीकरण बदला है। अगर ऐसा नहीं होता तो जिस राहुल गांधी ने कुछ महीने पहले कहा था कि समाजवादी पार्टी से गठबंधन का सवाल ही नहीं है वो अब समाजवादी पार्टी पर अपने विधायकों की राय क्यों जानना चाहेंगे। विधायकों ने तो अखिलेश के पक्ष में अपनी राय दी। लेकिन राहुल का क्या सोचना है ये अभी सामने नहीं आया है। जाहिर है राहुल अभी प्रदेश की राजनीति के आकलन के लिए थोड़ा और वक्त चाहते हैं।

सूत्र बताते हैं कि राहुल को ये सलाह भी दी जा चुकी है कि अगर गठबंधन कर आगे बढ़ना है तो जिसके साथ करना है जल्दी कर लें। क्योंकि देरी से गठबंधन लाभ ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा। राहुल ने जो सवाल पूछा उसके पीछे कांग्रेस की एक मजबूरी भी है। क्योंकि यूपी में पार्टी के 9 विधायक पहली ही पार्टी छोड़ चुके हैं। जो बाकी विधायक हैं उनमें से कई दूसरी पार्टियों के संपर्क में हैं। काग्रेस के पास मुश्किल 403 सीटों के लिए उम्मीदवार की तलाश करना है। पार्टी को ये डर भी सता रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशियों का ही अभाव हो जाए।

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