चुनाव हारकर भी दिल जीतने का एक सुनहरा मौका राहुल गांधी ने गंवा दिया

नई दिल्ली:  गुजरात हिमाचल विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं। इन दोनों राज्यों में वैसे तो कांग्रेस की हार हुई। लेकिन इन दोनों हार में काफी फर्क है। फर्क ये है कि एक राज्य (हिमाचल प्रदेश) में कांग्रेस को जनता ने नकार दिया, उसे अपनी सत्ता गंवानी पड़ी। लेकिन दूसरे राज्य (गुजरात) में वस्तु स्थिति अलग है। कांग्रेस की हार तो इस राज्य में भी हुई। लेकिन गुजरात में हारकर भी कांग्रेस ने काफी कुछ पा लिया है। 2012 के मुकाबले उसके सीटों की संख्या बढ़ी है। इस बात की उम्मीद किसी ने नहीं की थी कि कांग्रेस को यहां 80 सीट मिलेगी और बीजेपी, जो कभी 150 सीट जीतने का दावा कर रही थी वो 100 का आंकड़ा भी नहीं पा सकेगी। गुजरात में बीजेपी को 99 सीटें मिली जो कि 2012 से कम है।

गुजरात और हिमाचल में मिली हार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तरफ से स्वीकार किया गया। लेकिन जिस तरह से उन्होंने इस हार को स्वीकार किया उसे जनता की अपेक्षाओं की उपेक्षा के नजरिये से देखा जा रहा है। हार के बाद राहुल गांधी सामने नहीं आए । उन्हेंने इस हार को सोशल मीडिया के माध्यम से स्वीकार किया। यानि राहुल ने इस हार के बाद ट्वीट किया जिसमें उन्होंने जनता और कार्यकर्ताओं का धन्यवाद करते हुए इस हार को स्वीकार किया।

यहां पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बेहतरीन मौका खो दिया। अगर राहुल गांधी सामने आकर इस हार को स्वीकार करते और गुजरात में जिस तरह से मतदाताओं ने कांग्रेस में भरोसा जताकर उसके नंबर को 80 तक पहुंचा दिया उसमें पार्टी की एक जीत छिपी है। लेकिन इस बात पर गौर करने से चूक गए राहुल गांधी। उन्हें बस इतना करना था कि नतीजे आने के बाद सामने आकर जनता को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद कहना था। कार्यकर्ताओं की मेहनत की सराहना करनी थी। और पार्टी के उज्जवल भविष्य के लिए दोबारा से और भी बेहतर तरीके से कोशिश करना का संकल्प लेना था।

लेकिन इनमें से कुछ भी नहीं किया गया। वैसे इसे नजरअंदाज किया जा सकता है जैसा कि पार्टी ने किया भी। लेकिन जिस तरह से राहुल हार के बाद अंतर्ध्यान हो गए उसने कांग्रेस को वोट करनेवालों को निराश जरूर किया है। उन्हें ये एहसास होने लगा है कि उनका वोट बेकार गया। केवल एक सराहना की कमीं ने कांग्रेस को एक कदम पीछे धकेल दिया।

राजनीति में अकसर छोटी चूक से बड़ा नुकसान हो जाता है। मणिशंकर अय्यर ने भी यही किया। मोदी को उन्होंने नीच कह दिया। कांग्रेस की तरफ से कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन दूसरी तरफ बीजेपी ने इसी नीच बयान में अपनी जीत की कुंजी खोज ली। बीजेपी ने खासकर पीएम मोदी ने इसे गुजरात की अस्मिता से जोड़ दिया। पहले चरण के वोटिंग के बाद जहां बीजेपी नुकसान में चल रही थी वहीं दूसरे चरण में नीच के खेल ने कांग्रेस का गेम बिगाड़ दिया और मोदी बाजी पलटने में कामयाब रहे। जबकि कांग्रेस ये स्पष्टीकरण तक नहीं दे पाई कि गुजरात के अस्मिता की हिफाजत की परवाह उन्हें भी है।

इस एक शब्द ने कांग्रेस को विपक्ष में पहुंचा दिया और बीजेपी की सत्ता बरकरार रह गई। अगर कांग्रेस मणिशंकर मुद्दे पर सटीक रणनीति बना पाती तो गुजरात की तस्वीर शायद आज कुछ और होती।

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