सिंधू का सिल्वर मेडल सोना से कम नहीं

पीवी सिंधू महिला बैडमिनटन के फाइनल मुकाबले में भले ही हार गई और उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। लेकिन उनकी ये जीत सोने का मेडल जीतने से भी ज्यादा चमकदार है। क्योंकि इस जीत के पिछे सिंधू के साथ साथ उनके गुरू गोपीचंद की तपस्या जुड़ी है। उन सवा सौ करोड़ भारतवासियों की आस जुड़ी है जिन्होंने 18 अगस्त की पूरी रात और 19 अगस्त का पूरा दिन घड़ी पर आखों की टकटकी लगाए निकाल दिये।
रियो में जब सिंधू और कैरोलिना का मुकाबला शुरु हुआ तो रियो से लेकर हैदराबाद तक और चेन्नई से लेकर भोपाल, गांधीनगर, जालंधर, दिल्ली जम्मू-कश्मीर तक हर जगह बस दुवाओं का दौर चल रहा था। दर्शक अपने एक हाथ से दूसरे हाथ को सहारा दिये रियो में चल रहे मुकाबले के एक एक पल को टीवी पर टकटकी लगाए देख रहे थे। बैडमिंटन कोट के भीतर सिंधू के कदमों की हर हरकत एक उम्मीद जगा रही थी।

जब सिंधू पहला सेट जीती तो उम्मीद इधर भी जवां हुई। लेकिन दूसरे सेट में पिछड़ने के बाद उम्मीद तीसरे सेट पर जा टिकी। मुकाबला दोनों तरफ से बराबरी का था। कभी स्पेन की कैरोलीना एक अंक आगे निकलती तो कभी सिंधू। स्कोर बोर्ड पर मानो दोनों खिलाड़ियों के अंक आपस में कदमताल कर रहे हों। जिस अनुशासन और लय के साथ सिंधू महिला सिंगल मुकबाले में बैडमिंटन के साथ न्याय कर रही थीं उसी तरह इस खेल ने भी सिंधू के दिये सम्मान को स्वीकार किया था। तीसरे राउंड में अंतिम क्षण में विजेता कैरोलीना घोषित हुई। इसके साथ सिंधू भारत की तरफ से ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली पहली महिला खिलाड़ी बन गई।

सिंधू की इस जीत के बाद शुरु हुआ बधाई देने का सिलसिला। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री ने सिंधू को ट्वीटर के जरिये बधाई संदेश भेजे। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने भी सिंधू को इस अमूल्य जीत के लिए बधाई दी। दिल्ली सरकार की तरफ से सिंधू के लिए 2 करोड़ के इनाम का एलान किया गया है। बधाई के संदेश बॉलीवुड की तरफ से भी आए।

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