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ग्रेटर नोएडा: आम्रपाली बिल्डर ने कैसे कर्ज के खेल में बायर्स को फंसाया?

ग्रेटर नोएडा: आम्रपाली बिल्डर ने कैसे कर्ज के खेल में बायर्स को फंसाया?

नई दिल्ली:   रात के ख्वाब जब दिन में आंखों को चुभने लगते हैं, जब मन ये एहसास कराता है कि किसने कहा था तुम्हें भरोसा करने को, जमाने की घूरती निगाहें जब ये बताने लगती हैं कि सड़क पर चलनेवालों के लिए ऊंची इमारतों में विरसत की आस देखना पाप है और जब घर खाली हो जाता है और हाथ में कुछ नहीं आता है तब रौशनी लेकर इंसानों का एक झुंड निकल पड़ता है सिस्टम के उन सरमायेदारों की तलाश में जिसे संविधान की भाषा में प्रशासन और प्रशासक कहा जाता है।

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लेकिन एनसीआर के इन फ्लैट खरीदारों के साथ आम्रपाली बिल्डर ने वो खेल खेला है जिसके आगे सरकार से लेकर साहेब तक मौन हैं। बिल्डर से धोखा खाकर इन्होंने जो सवालों की लिस्ट तैयार की है उसका सामने करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है प्रचंड बहुमत वाली सरकार। यही वजह है इस इन्होंने अपनी बात बताने के लिए एक सांकेतिक सरकार तैयार की है। स्थानीय भाषा में इसे ही भैंस कहा जाता है।

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लेकिन यहां हंसने वाली बात नहीं है। जब सरकार सुनने से इनकार कर दे यही भैंस काम आती है। जिसके आगे आम्रपाली बिल्डर पर भरोसा कर अपना घर खरीदने वाले बायर्स बीन बजाकर ये पूछ रहे हैं कि ग्रेटर नोएडा में बजनेवाली बीन की ये धुन लखनऊ कबतक पहुंच जाएगी। ये सवाल अपनी जगह आज भी है और कल भी रहेंगे। लेकिन आईये पहले आम्रपाली बिल्डर के उस खेल को समझ लीजिये जिससे झांसे में हजारों बायर्स फंस गए।

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आम्रपाली बिल्डर ने कैसे दिया बायर्स को धोखा?

ग्रेटर नोएडा में फ्लैट बायर्स के साथ आम्रपाली बिल्डर्स ने किस तरह से धोखे का खेल खेला उसे इस तरीके से समझा जा सकता है। इसके चार हिस्से हैं पहला खुद आम्रपाली बिल्डर, दूसरा अथॉरिटी, तीसरा बैंक और चौथा बायर्स। बायर्स को यहां पर चौथे नंबर पर इसलिए रख जा रहा है क्योंकि सबसे दयनीय हालत इन्हीं बायर्स की है। जो बैंकों का कर्जदार भी बन गए औऱ सड़क पर धक्के भी खा रहे हैं। अब आम्रपाली बिल्डर के इस खेल को समझिये…

आम्रपाली ने अथॉरिटी से बिल्डिंग बनाने के लिए जमीन खरीदी। अब अगर अथॉरिटी की तरफ से जमीन की कीमत 100 रुपये रखी गई तो आम्रपाली ने शुरुआत में अथॉरिटी को उसका कुछ हिस्सा दे दिया। मान लीजिये आम्रपाली ने 20 रुपये चुका दिये।

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आम्रपाली बिल्डर से धोखा मिलने के बाद अब भागवान का सहारा

इसके बाद उनसे अपने प्रोजेक्ट का निर्माण शुरु कर दिया। इसके लिए उसने बैंक से कर्ज भी ले लिया। दूसरी तरफ उसने बायर्स को फ्लैट भी बेच दिया। यानि यहां पर आम्रपाली तीन तरफ से फायदे में रहा। पहला उसने अथॉरिटी से कुल रकम का कुछ हिस्सा ही चुकाया और जमीन पर बिल्डिंग बनाना शुरु कर दिया। उसके बाद उसने बैंक से कर्ज ले लिया औ तीसरा उसे बायर्स से भी पैसे मिलने लगे।

अब अगर कंपनी दिवालिया हो जाती है तो कंपनी की संपत्ति बेचकर पैसे की भरपाई की जाएगी। लेकिन उस पैसे पर पहला हक बैंक का होगा। क्योंकि बैंक ने उसे कर्ज दिया। इसके बाद अथॉरिटी भी अपने पैसे की मांग करेगा। इस दौड़ में बायर्स का नंबर सबसे अंत में आएगा। यानि बायर्स को इस नीलामी से पैसे तभी मिलेंगे जब बैंक और अथॉरिटी में पैसे बंटने के बाद जो कुछ बचेगा। हलांकि अभी आम्रपाली के साथ दिवालिया वाली बात नहीं है। लेकिन जेपी बिल्डर का हाल देखने के बाद बायर्स में डर जरुर घर कर गया है। यही वजह है कि वो अपने घर की मांग को लेकर सड़कों पर बैठे हैं।

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