उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाकर फंस गई मोदी सरकार !

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाकर फंस गई मोदी सरकार !

  • उत्तराखंड मामले पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची केंद्र सरकार
  • शिवसेना ने कहा केंद्र सरकार का हुआ ‘वस्त्र हरण’

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन पर केंद्र सरकार की जितनी फजीहत हो सकती थी हो रही है। जिस तरह से जल्दबाजी में राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला लिया गया था उत्तराखंड में, उसपर उसी तरह से नैनीताल हाईकोर्ट के सामने केंद्र सरकार की सारी दलील धरी रह गई। फटकार लगी सो अलग, किरकिरी हुई सो अलग, विरोधियों के निशाने पर आई मोदी सरकार सो अलग, लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास न करने के आरोप लगे सो अलग। बाहर वालों की बात छोड़िये अब तो खुद बीजेपी की सहयोगी शिवसेना ने यहां तक कह दिया कि उत्तराखंड में जिस तरह से केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाने का फैसला लिया उससे केंद्र सरकार का ‘वस्त्र हरण’ हो गया।

राष्ट्रपति शासन पर नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के बाद बीजेपी नेताओं के सुर में जरुरत से ज्यादा नरमी आई है वहीं विरोधी उतने ही ज्यादा हमलावर हो चुके हैं। इसकी वजह भी है। क्योंकि अब विरोधियों के पास कहने के लिए काफी कुछ है। और बीजेपी के पास उन हमलों को झेलने के सिवाय कोई और चारा नहीं है। क्योंकि कहने का हक खो चुकी है बीजेपी या केंद्र सरकार।

नैनीताल हाईकोर्ट से मायूसी और फटकार के बाद अब केंद्र सरकार की पूरी उम्मीद सुप्रीम कोर्ट से है। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की बेंच के सामने अपील की है। इसपर फैसला चीफ जस्टिस लेंगे।

दूसरी तरफ कांग्रेस है। जिसके लिए काफी इंतजार के बाद कोई अच्छी खबर आई। नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेसी खुश हैं। अब तैयारी 29 अप्रैल की हो रही है। क्योंकि रावत सरकार को अपना बहुमत साबित करने के लिए 31 विधायकों का जुगाड़ करना है। 71 सदस्यों वाली विधानसभा में 9 बागी विधायक निष्कासित हैं। इसलिए ये तय नहीं है कि वो वोटिंग में शामिल होंगे या नहीं।

कैबिनेट बैठक की इतनी जल्दी क्यों ?

नैनीताल हाईकोर्ट के फैसले के बाद हरीश रावत इतने उत्साहित हो गए की राष्ट्रपति शासन हटाने का लिखित आदेश मिलने से पहले ही हरीश रावत ने कैबिनेट बैठक बुला ली। जिसमें ताबड़तोड़ 11 फैसले लिये गए। इसपर उत्तराखंड के कांग्रेसी विधायकों का कहना है कि नैनीताल हाईकोर्ट के बाद कैबिनेट बैठक बुलाई गई । इसलिए इसमें कुछ भी गलत नहीं है। इसपर राज्यपाल ने मुख्य सचिव से ये सवाल पूछा है कि बगैर लिखित आदेश के कैबिनेट की बैठक कैसे बुलाई गई।

लेकिन इन पूरे मसले के सामने आने के बाद इतना तय है कि आनेवाले संसद सत्र में विरोधी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है।

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