अगर यूपी का गणित ऐसा हुआ तो बीजेपी की जीत तय है




नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की सियासी लड़ाई अब काफी बदल चुकी है। महीने भर पहले तक जहां यूपी की लड़ाई में चार दावेदार थे वहीं अब इसमें तीन दावेदार हैं। और लड़ाई चौतरफा से तीन तरफा में तब्दील हो चुकी है। क्योंकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस आपस में गठबंधन का मन बना चुके हैं। इसके बाद राज्य के मुस्लिम वोटरों की भूमिका काफी अहम हो गई है।

समाजवादी पार्टी और कांग्रेस मुस्लिम वोटरों को एक साथ रखने के लिए प्रयासरत है तो वहीं बीजेपी चाह रही है कि मुस्लिम वोटर आपस में बंट जाएं। अगर मुस्लिम वोटर बंट जाते हैं और सवर्ण, ओबसी और दूसरी कृषक समुदाय को बीजेपी अपने पक्ष में कर लेती है तो उसका काम आसान हो जाएगा। मुस्लिम वोटरों के बंटने की बात इसलिए भी कही जा रही है क्योंकि मायावती ने बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। उनमें से ज्यादातर वो हैं जिनकी मुस्लिम वोटबैंक पर पकड़ है।

वहीं दूसरी तरफ पिछले दिनों समाजवादी पार्टी में मचे जंग की वजह से मुस्लिम मतदाता अपना नया ठिकाना तलाश रहे थे। ये भी संभव है कि उनमें से कई ने अपना मन बीएसपी के साथ जाने का बना भी लिया होगा। इसकी वजह ये है कि समाजवादी पार्टी के झगड़े ने मुस्लिम वोटरों के सामने अनिश्चितता की स्थिति ला दी। मतदाता ये तय करने में खुद को असहज महसूस कर रहे थे कि मुलायम और अखिलेश में से किसे वो अपना मानें।

मुस्लिमों को इस उहापोह की स्थिति से बेहतर विकल्प बीएसपी में दिखाई दी। दूसरी तरफ मायावती ने 100 मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारकर मुस्लिम मतदाताओं के लिए उम्मीदवारों का चुनाव करना आसान बना दिया।

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक पार्टी को जाटों और दूसरे खेतिहर समुदायों का समर्थन मिलने का भरोसा है। हलांकि जाट काफी वक्त से अजीत सिंह की आरएलडी का साथ देते रहे हैं लेकिन पहले के मुकाबले आरएलडी इसबार कमजोर दिखाई दे रही है। इसके साथ साथ बीजेपी गैर यादव पिछड़े वोटरों से भी उम्मीद लगाए बैठी है। बीजेपी तकरीबन 50 फीसदी टिकट इस वर्ग के उम्मीदवारों को दे सकती है।

बीजेपी को उम्मीद है कि कुर्मी, प्रजापति, मौर्य, पाल, राजभर, मल्लाह, केवट, कुशवाहा जैसी पिछड़ी जातियों की इस चुनाव में अहम भूमिका होगी।

बीजेपी इन जातियों के बीच खुद को विकल्प के तौर पर पेश कर रही है। बीजेपी का मानना है कि सवर्ण वोटबैंक पूरी तरह से उसके पक्ष में है। लेकिन पार्टी को इसका भी एहसास है कि यूपी में जीत के लिए सवर्णों के साथ साथ ओबीसी वोटबैंक का भी समर्थन हासिल करना होगा। लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि बीजेपी की सबसे बड़ी उम्मीद इस बात पर टिकी है कि मुस्लिम वोटबैंक बंट जाए।

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