क्या ईद के वक्त मौलवी को पुलिस गिरफ्तार करने का साहस दिखा सकती है- प्रणब मुखर्जी

नई दिल्ली:  शुक्रवार को पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब का विमोचन हुआ। उस किताब में प्रणब मुखर्जी ने यूपीए सरकार और उसकी कई नीतियों और फैसलों के बारे में जिक्र किया है। प्रणब मुखर्जी की किताब के बाद एक बार फिर बीजेपी कांग्रेस को मुस्लिम तुष्टिकरण वाली पार्टी करार दे सकती है। क्योंकि इस किताब में प्रणब मुखर्जी ने एक ऐसी घटना का जिक्र किया है जिससे ये साफ हो रहा है कि प्रणब मुखर्जी यूपीए सरकार के उस फैसले के खिलाफ थे। जिसे उन्होंने कैबिनेट में भी उठाया था। उनके सवालों को सुनकर पूरी कांग्रेस सन्न रह गई थी।

‘द कोलिशन ईयर्स 1996-2012’ ये शीर्षक पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब का है। इसी किताब में उन्होंने कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि 2004 में कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे। प्रणब मुखर्जी  ने किताब में लिखा है कि वो जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी से बेहद नाराज थे। सरकार के सामने भी उन्होंने इस नाराजगी को जाहिर किया था। उन्होंने लिखा है कि पुलिस की इस कार्रवाई से वो बेहद गुस्से में थे और कैबिनेट के सामने भी उन्होंने इसे उठाया था।

प्रणब मुखर्जी ने किताब में लिखा है कि एक कैबिनेट बैठक के दौरान मैं इस गिरफ्तारी की टाइमिंग को लेकर नाराज था। मैंने सवाल पूछा कि क्या देश में धर्मनिरपेक्षता का पैमाना केवल हिंदू संत महात्माओं तक ही सीमित है? क्या किसी राज्य की पुलिस किसी मुस्लिम मौलवी को ईद के मौके पर गिरफ्तार करने का साहस दिखा सकती है। दरअसल कांची पीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को 2004 में नवंबर के महीने में दीवाली के वक्त हत्या के आरोप में आंध्र प्रदेश से गिरफ्तार किया गया था।

दरअसल यूपीए सरकार के दौरान कांग्रेस पार्टी पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगे थे। तब बीजेपी ने इसे चुनावी मुद्दा भी बनाया था। इसके बाद प्रणब मुखर्जी की किताब में कही गई ये बात एक बार फिर बीजेपी के लिए एक मुद्दा बन सकती है। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 2004 में यीपीए की सरकार बनी थी। तब प्रणब मुखर्जी मई 2004 से अक्टूबर 2006 तक प्रणब मुखर्जी रक्षा मंत्री थे।

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