Sonia के जन्मदिन पर सियासी तैयारी !

Sonia के जन्मदिन पर सियासी तैयारी !

बधाई Sonia को लेकिन तैयारी एक जीत की
10 जनपथ से 7 RCR तक ताक झांक !

9 दिसंबर 2015 यानि वो दिन जब कांग्रेस अध्यक्ष Sonia गांधी का जन्मदिन मनाया गया। 10 जनपथ के बाहर सुबह से ही ढोल नगाड़ों और जयकारे के नारे लगाए जा रहे थे। कांग्रेसी कार्यकर्ता समवेत स्वर में Sonia को जन्मदिन की बधाई दे रहे थे। Sonia बधाई स्वीकार करने उनके सामने भी प्रकट भी हुईं हाथ हिलाकर उनका अभिवादन भी किया और फिर भीतर चली गईं। ये तो था 10 जनपथ के बाहर का दृष्य। एक नया दृश्य बना हुआ था संसद के भीतर। जहां नेशनल हेराल्ड मामले में दिल्ली की एक अदालत में पेश होने का आदेश आने के बाद लगातार दूसरे दिन कांग्रेसी शोर मचाते रहे। मोदी सरकार हाय हाय के नारे लगाते रहे और ये कहते रहे कि मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी। शोर इतना हुआ कि सदन की कार्यवाही उसी तरह से स्थगित होती रही जैसे कि 8 दिसंबर यानि मंगलवार को हुई थी। यानि कोर्ट के एक मामले पर संसद का दो दिन बर्बाद हो गया। हलांकी कांग्रेसी सांसदों की तादाद काफी कम है सदन मे। लेकिन शोर के सामने सदन का कामकाज जारी रखना मुमकिन नहीं हुआ। खैर यो तो Sonia के जन्मदिन का दूसरा दृश्य था। अब तीसरे दृश्य का जिक्र करते हैं। इस तीसरे दृश्य में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी Sonia गांधी से मिलती हैं, एनसीपी प्रमुख शरद पवार Sonia से मिलते हैं। कहा तो ये जा रहा है कि जन्मदिन पर बधाई देने भर के लिए ही ये मुलाकात थी। लेकिन समझनेवाले तो समझ ही रहे हैं कि राजनीति मकसद वाली मुलाकात इन्हीं मौकों पर परवान चढ़ती हैं।

संसद में दूसरे दलों को साथ लाकर सरकार पर हमला बोलेगी कांग्रेस ?

नेशनल हेराल्ड पर कांग्रेस के विरोध के सामने सरकार बेबस दिखाई दे रही है। हलांकी ये सच है कि इस विरोध में सदन के भीतर कांग्रेस अकेली खड़ी दिखाई दे रही है। लेकिन इस बात का एहसास उसे भी है कि अकेले अपने दम पर इस विरोध को ज्यादा दिन तक जारी नहीं रखा जा सकेगा। सरकार पर विरोधी भारी पड़ें इसके लिए जरुरी है कि बाकी दल भी कांग्रेस के समर्थन में साथ आएं। क्या नेशनल हेराल्ड मामले पर दूसरे दलों को अपने पक्ष में लाने के लिए कांग्रेस की तरफ से Sonia के घर शरद पवार और ममता बनर्जी को बुलाया गया था। जिसमें केंद्र सरकार के खिलाफ रणनीति तैयार की गई।

बीजेपी के खिलाफ तैयार हो रहा है नया मोर्चा

इतना तो तय है कि बीजेपी के रोकने के लिए विरोधी दल किसी भी हद तक जा सकते हैं। बिहार में ये दिख भी गया। जहां लालू-नीतीश जैसे दो विरोधियों को साथ आने पर मजबूर होना पड़ा। उसी बीजेपी को पराजित करने के लिए बाकी दल अपना मनमुटाव किनारे रखकर आपस में एक मजबूत मोर्चा बनाने की तैयारी में है। इसे लेकर बातचीत तो कई दौर की हो चुकी है। लेकिन अबतक कोई ठोस नतीजा देखने को नहीं मिला है। शायद इसकी वजह ये हो कि 2019 आने में अभी चार साल बाकी है। इसलिए विरोधी दलों के पास जल्दबाजी की कोई वजह नहीं है। वो इत्मीनान से खमोशी के साथ बीजेपी खिलाफ एक मोर्चा तैयार करने में जुटे हैं।

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