बाबा केदारनाथ मंदिर में है अद्भुत शक्ति, जानिये कैसे हुआ मंदिर का निर्माण

नई दिल्ली: पीएम मोदी आज दूसरी बार उत्तराखंड में बाबा केदारनाथ के दर्शन करने गए। उन्होंने वहां पूजा अर्चना की। साथ ही केदारनाथ के पुनर्निर्माण के लिए कई योजनाओं की शुरुआत भी की। पीएम मोदी ने कहा 2013 में जब केदारनाथ में भयंकर त्रासदी आई थी तब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था। उस वक्त मैंने मदद के लिए हाथ बढ़ाया था। लेकिन मेरी उस पहल से दिल्ली की सरकार में हड़कंप मच गया था। और उनके दबाव में उत्तराखंड की सरकार ने मदद लेने से इनकार कर दिया था। लेकिन बाबा केदारनाथ ने तय किया कि बाबा का बेटा ही बाबा की सेवा करेगा।

बताया जाता है कि केदारनाथ का मंदिर 400 सालों तक बर्फ के अंदर पूरी तरह से ढका रहा। इसे द्वादस ज्योर्तिलिंग के नाम से भी जाना जाता है। जिस जगह पर केदारानाथ मंदिर है वो बेहद ही मनमोहक है। ये चारों तरफ से पहाड़ से घिरा है और दो तरफ मन्दाकिनी और सरस्वती नदियों के बीच में बना है भगवान शिव का ये मंदिर।

पुराणों के अनुसार महाभारत की लड़ाई के बाद पांडवों को जब अपने ही भाइयों के मारे जाने पर दुख हुआ तो वो पश्चाताप करने के लिए केदार की भूमि पर पहुंच गए। कहा जाता है उन्होंने ही इस मंदिर की स्थापना की। केदारनाथ के लिए गौरीकुंड से 15 किलोमीटर की लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। लेकिन 2013 की त्रासदी के बाद ये दूरी थोड़ी बढ़ गई है। क्योंकि पहले वाले रास्ते से हटकर नये रास्ते का निर्माण किया गया है।

केदारनाथ में दर्शन सुबह 6 बजे से दोपहर के 2 बजे तक और शाम को 3 बजे से 5 बजे तक किये जा सकते हैं। इससे पहले पीएम मोदी केदारनाथ उस वक्त आए थे जब मंदिर के कपाट खुले थे। और दूसरी बार तब आए हैं जब मंदिर के कपाट बंद होनेवाले हैं।

2013 में केदारनाथ में भयंकर त्रासदी आई थी। जिसमें तकरीबन 4500 लोगों की मौत हो गई थी। लेकिन यहां बने बाबा केदारनाथ के मंदिर को कोई नुकसान नहीं हुआ। ये किसी चमत्कार से कम नहीं था। क्योंकि मंदिर के आसपास बने सारे निर्माण तिनकों की तरह बह गए थे।

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