man ki baat

पीएम के मन की बात में इमरजेंसी का जिक्र, वाजपेयी की कविता भी सुनाई, आप भी सुनें

पीएम के मन की बात में इमरजेंसी का जिक्र, वाजपेयी की कविता भी सुनाई, आप भी सुनें

नई दिल्ली:  पीएम मोदी ने महीने के आखिरी रविवार को एक नई परंपरा शुरु की। जिसमें पीएम मोदी मन की बात के जरिये देश को संबोधित करते हैं। जिसमें ज्वलंत मुद्दों का जिक्र किया जाता है साथ ही लोगों के कई सुझाव भी इस कार्यक्रम में शामिल किये जाते हैं। रविवार को भी पीएम मोदी ने मन की बात की। जिसेमें भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का जिक्र किया गया, हाल में संपन्न हुए योग दिवस में लोगों की भागीदारी की चर्चा हुई साथ ही इसमें इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपात काल का जिक्र किया और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता भी पढ़ी।

मन की बात में पीएम मोदी ने कहा मौसम बदल रहा है। इस बार गर्मी भी बहुत रही। लेकिन अच्छा हुआ कि वर्षा ऋतु समय पर अपने नक्शे कदम पर आगे बड़ रही है। जीवन में कितनी भी आपाधापी हो, तनाव हो, व्यक्तिगत जीवन हो, सार्वजनिक जीवन हो बारिश का आगमन मन: स्थिति को बदल देता है।

पीएम ने भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा आज भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकल रही है। देश के कई भागों में बहुत ही श्रद्धा और उल्लासपूर्वक देशवासी मनाते हैं। भारत की विविधता इसकी विशेषता भी है और ये भारत की शक्ति भी है। पीएम ने आगे कहा अब ईद का त्योहार है। ईद उल फित्र के अवसर पर मेरी तरफ से सबको शुभकामनाएं। रमजान खुशियां बांटने का महीना है। हम इन पवित्र आवसरों से खुशियां बांटते चलें।

इमरजेंसी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा इमरजेंसी के दौरान अखबार को बेकार कर दिया गया। 25 जून 1975 की रात भारतीय लोकतंत्र के लिए काली रात थी। इमरजेंसी के दौरान अटल जी जेल में थे। उस रात को कोई भारतवासी, कोई लोकतंत्र प्रेमी भुला नहीं सकता। एक प्रकार से देश को जेलखाने में बदल दिया गया था। विरोधी स्वर को दबोच दिया गया था। न्याय व्यवस्था भी आपातकाल के उस भयावह रुप की छाया से बच नहीं पाई थी। पीएम ने मन की बात में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता भी पढ़ी

झुलसता जेठ मास

शरद चांदनी उदास

सिसकी भरते सावन का

अंतर्घट रीत गया

एक बरस बीत गया

सीखचों में सिमटा जग

किंतु विलय प्राण विहग

धरती से अम्बर तक

गूंज मुक्ति गीत गया

एक बरस बीत गया

पथ निहारते नयन

गिनते दिन पल छिन

लौट कभी आएगा

मन का जो मीत गया

एक बरस बीत गया

पीएम ने बिजनौर के मुबारकपुर गांव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा वहां तकरीबन तीन हजार मुस्लिम परिवार हैं। गांव वालों ने शौचालय बनवाया। 17 लाख रुपये सरकारी सहायता दी गई। लोगों ने वापस लौटा दिये कहा हम अपना शौचालय अपने परिश्रम से बनवाएंगे। मुबारकपुर के सभी ग्रामजनों को बधाई उनकी एक एक चीज प्रेरक है। उन्होंने मुबारकपुर को खुले में शौच से मुक्त कर दिया। सिक्किम, हिमाचल और केरल पहले ही खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं। इसी हफ्ते उत्तराखंड और हरियाणा भी खुले में शौच से मुक्त हुए।

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