गौरक्षकों पर मोदी के बयान से भड़की VHP, कहा ‘चुनाव के बाद बदल गए बोल’

  • मुट्ठी भर लोग देश की एकता तोड़ना चाहते हैं-पीएम
  • लगातार दूसरे दिन गौरक्षकों पर भड़के पीएम

मेडक/तेलंगाना: रविवार को एक जनसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने लगातार दूसरी बार अपराधियों के गौरक्षक का चोला पहनने पर बयान दिया। तेलंगाना के मेडक में पीएम मोदी ने कहा ‘कुछ लोग गौरक्षा के नाम पर समाज में टकराव लाने की कोशिश करक रहे हैं। और ऐसे लोगों को दंडित करने की जरुरत है। राज्य सरकारें उन पर कठोर कार्रवाई करें। सच्चे गौरक्षक खुल कर नकली गौरक्षकों को बेनकाब करें।‘ पीएम ने आम लोगों से भी नकली गौरक्षकों को पहचानने की अपील की। पीएम ने कहा ‘भारत विविधताओं का देश है। देश की अखंडता एकता हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसे परिपूर्ण करने के लिए सकारात्मक रुप से गौसेवा करें। लेकिन नकली लोग समाज, देश को तबाह करते हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग करने की जरुरत है। इन्हें दंडित करने की जरुरत है। गाय को कृषि से जोड़ा जाए तो वो बोझ नहीं बनेगी।‘

हाल के दिनों में गौरक्षा के नाम पर जिस तरह से दिलतों को निशाना बनाया गया उसके बाद एक सियासी भूचाल आया हुआ है। उस भूचाल और बवाल के बीच पीएम का ये बयान उन तथाकथित गौरक्षकों को अखर गया जो खुद को गौमता के असली भक्त और पालनहार मान रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद ने भी पीएम के बयान पर आपत्ति जता दी। इसका कहना है की प्रधानमंत्री 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले गौरक्षा पर जो कहते थे आज उससे भटक गए हैं। अपना बयान बदलकर वो लोगों का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी पूछ रहे हैं कि ‘मोदी जी ने जो 70-80 फीसदी गौरक्षकों के आपराध में शामिल होने की बात कही तो वो बताएं कि उन्हें यह आंकड़ा किस एजेंसी ने दिया है?’

हलांकी मोदी ने अपने दोनों दिन (शनिवार और रविवार) को दिये बयान में साफ किया था कि कुछ गौरक्षक जिनकी तादाद 70-80 फीसदी तक है वो रात को एंटीसोशल एक्टिविटी करते हैं और दिन में गौरक्षक का चोला पहन लेते हैं। तेलंगाना के मेडक में दिये भाषण में पीएम ने राज्य सरकारों से फर्जी गौरक्षकों पर कार्रवाई करने की अपील की है। शनिवार को टाउनहॉल कार्यक्रम के दौरान भी पीएम ने कहा था कि राज्य सरकार उन नकली गौरक्षकों का डॉजीयर तैयार करें।

पीएम के इस बयान से राज्य सरकारें कितना इत्तेफाक रखती हैं या राज्य सरकारें किस हद तक कार्रवाई करती हैं इसके लिए इंतजार जरुरी है। लेकिन इतना साफ है कि पीएम मोदी के इस बयान के बाद अब सवाल ये है कि असली और नकली गौरक्षकों की पहचान कितनी गंभीरता से की जाती है। या फिर गौरक्षा के मुद्दे पर केवल एक लंबी बहस और तकरार का दौर चलेगा और फिर सबकुछ खामोशी में बदल जाएगी।

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