अयोध्या: सुनवाई टालने की मांग नहीं की, कांग्रेस के इशारे पर सिब्बल ने की- सुन्नी वक्फ बोर्ड

अयोध्या: सुनवाई टालने की मांग नहीं की, कांग्रेस के इशारे पर सिब्बल ने की- सुन्नी वक्फ बोर्ड

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई अब अगले साल फरवरी में होगी। लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल में कोर्ट के सामने ऐसी मांग रख दी कि उसपर वो खुद ही घिर गए। सिब्बल ने कोर्ट से अयोध्या मामले की सुनवाई अप्रैल 2019 यानि लोकसभा चुनाव तक टालने की मांग की थी।

सिब्बल के इस मांग पर बीजेपी ने कांग्रेस से सवाल किया है कि पार्टी अपना रुख साफ करे कि वो अयोध्या में राम मंदिर चाहती है या नहीं। कोर्ट में सिब्बल के बयान पर कांग्रेस ने कहा वो सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील हैं। और उन्होंने ऐसा एक वकील के तौर पर किया है ना कि कांग्रेस पार्टी के नेता के तौर पर। लेकिन कांग्रेस की दलील उस वक्त फीकी साबित हो गई जब सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से ये सफाई दी गई कि उसने कभी भी अयोध्या मामले की सुनवाई टालने की मांग नहीं की। सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से ये भी कहा गया कि वो सुनवाई टालने के पक्ष में नहीं है क्योंकि वो भी चाहते हैं कि अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला जल्द आए।

सिब्बल पर सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से कहा गया कि सिब्बल ने जो तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है वो उसकी निंदा करते हैं। साथ कहा कि सिब्बल ने कांग्रेस के इशारे पर कोर्ट में अयोध्या मामले की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट में सिब्बल के बयान की गूंज आज गुजरात चुनाव में भी सुनाई दी। पीएम मोदी ने अयोध्या मामले के एक पक्षकार हाजी महबूब अंसारी के हवाले से कहा कि कांग्रेस अहम मुद्दों को ऐसे ही लटका कर रखना चाहती है। उन्होंने कहा मैं सुन्नी वक्फ बोर्ड का आभार व्यक्त करता हूं। आज सुन्नी वक्फ बोर्ड ने साफ कर दिया कि सिब्बल उनके वकील जरूर हैं लेकिन कोर्ट में जो कुछ उन्होंने कहा वो गलत है। जिस देश में शिया वक्फ बोर्ड, सुन्नी वक्फ बोर्ड और राम मंदिर वाले शांति से रास्ता निकालने की कोशिश में लगे हैं उसमें वो रोड़ा अटकाना चाहते हैं।

दरअसल सुन्नी वक्फ बोर्ड के हाजी महबूब अंसारी ने साफ कहा कि उन्होंने कभी सिब्बल से सुनवाई टालने की मांग करने के लिए नहीं की थी। सिब्बल ने कांग्रेस के इशारे पर कोर्ट में सुनवाई टालने की मांग की।

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