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वायुसेना के पायलट को नहीं रोका जाता को नवाज और मुशर्रफ 1999 में मारे जाते

वायुसेना के पायलट को नहीं रोका जाता को नवाज और मुशर्रफ 1999 में मारे जाते

नई दिल्ली:  1999 के करगिल की लड़ाई में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। जिसके मुताबिक 24 जून 1999 को वायुसेना का पायलट पाकिस्तानी मिलिट्री बेस पर बम गिराने ही वाला था कि उसे रोक दिया गया। बाद में पता चला कि उस वक्त उस मिलिट्री बेस पर तत्कालीन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ भी मौजूद थे। एक सीनियर पायलट ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। क्योंकि वाजपेयी सरकार की तरफ से निर्देश थे कि वायुसना एलओसी पार नहीं करेगी।

एबीपी न्यूज की वेबसाइट पर छपी रिपोर्ट में कहा गया है कि वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल ए के सिंह के साथ हुई बातचीत के बाद ये खुलासा किया है। एयर मार्शल ए के सिंह ने ही 1999 में वायुसेना का जैगुआर लड़ाकू विमान को नवाज शरीफ और मुशर्रफ पर बम गिराने से रोका था।

वेबसाइट के मुताबिक 24 जून 1999 को भारतीय वायुसेना के एक जगुआर के पायलट को ऐसा करने पर रोका था। उन्हें इसलिए रोका गया क्योंकि तब की वाजपेयी सरकार ने वायुसेना को एलओसी पार न करने की हिदायत दी थी। पूर्व एयर मार्शल ए के सिंह ने बताया जगुआर लड़ाकू विमान के पायलट ने पाकिस्तान के फॉर्वर्ड मिलिट्री बेस पर हमला करने के लिए अटैक सिस्टम को लॉक कर दिया था। तभी पीछे से आर रहे दूसरे लड़ाकू विमान के सीनियर पायलट को रेडियो कम्युनिकेशन के जरिये जानकारी मिल गई। जिसके बाद पीछ से आ रहे फाइटर पायलट ने जगुआर के पायलट को ऐसा करने से रोक दिया।

इसके अगले दिन ये पता चला कि पाकिस्तान के जिस गुलटेरी मिलिट्री बेस पर हमला करनेवाले थे वहां तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ भी मौजूद थे। दोनों करगिल युद्ध के दौरान सैनिकों को संबोधित करने आए थे। पाकिस्तान का फॉर्वर्ड गुलटेरी मिलिट्री बेस एलओसी से महज 9 किलोमीटर दूर था।

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