पाटीदार आरक्षण पर सुलग रहा है गुजरात

पाटीदार आरक्षण पर सुलग रहा है गुजरात

हरियाणा के रास्ते पर तो नहीं चल रहा गुजरात ?
गुजरात के मेहसाणा पाटीदार आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। इसबार शुरुआत जेल भरो आंदोलन से हुई लेकिन आंदोलन ने हिंसक रुख अपना लिया। नतीजा ये हुआ की धारा 144 के साथ-साथ कर्फ्यू लगाना पड़ा। पाटीदारो ने कई जगह आगजनी की शुरुआत कर दी। जिसे काबू में करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज तक करना पड़ा। हलाकी अब मेहसाणा से कर्फ्यू हटा दिया गया है लेकिन पाटीदारों का हंगामा जारी है। हालात किस कदर गंभीर हो गए इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इलाके में सोशल मीडिया और इंटरनेट सेवा बंद कर दिया गया। मेहसाणा की आग सूरत तक पहुंच गई। सूरत में भी धारा 144 लागू करना पड़ा। तीन शहरों मेहसाना, सूरत और अहमदाबाद में मोबाइल और इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है। पाटीदार आरक्षण और अपने नेता हार्दिक पटेल की रिहाई की मांग कर रहे हैं। कुछ महीनों पहले हार्दिक पटेल ने एक रैली की थी। जिसमें लाखों की भीड़ पहुंची थी। उसी सभा में 22 साल के हार्दिक पटेल ने पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग की थी। ये ऐलान भी किया था की अगर आरक्षण की मांग नहीं मानी जाती है तो आंदोलन और तेज होगा। खैर उस वक्त किसी तरह मामला शांत हुआ। हार्दिक पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया। अब भी वो जेल में बंद हैं। लेकिन अब एकबार फिर पाटीदार अपने आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर हैं। अपनी मांग को लेकर पाटीदारों ने गुजरात बंद का एलान किया है। पाटीदार नेता लाल जी टंडन ने एलान किया है कि मांग जबतक पूरा नहीं होगा तबतक आंदोलन जारी रहेगा। वहीं पाटीदारों की इस मांग पर कहना है कि जिसे आंदोलन करना है वो आदोलन करे हमारा काम जनता की सेवा करना है और वो हम कर रहे हैं। सरकार के इस रुख और आंदोलन कारियों के तेवर को देखकर हरियाणा में हुए जाट आंदोलन की याद ताजा हो जाती है।

हरियाणा की राह पर तो नहीं है गुजरात ?
हरियाणा में हुए जाट आंदोलन की याद आज भी ताजा है। रोहतक, सोनीपत, भिवानी में आज भी उस हिंसक आंदोलन के निशान मौजूद हैं। हरियाणा मे भी शुरुआत रेल की पटरियों पर धरने से हुई थी। लेकिन कुछ दिनों में ही आंदोलन शहर के भीतर प्रवेश कर गया और चार दिनों में हजारों करोड़ की संपत्ति स्वाहा कर दी गई। आंदोलन इस तरह से बेकाबू हुआ की सरकार से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक पंगु होकर रह गया। बेकाबू आंदोलनकारियों ने पूरे के पूरे शहर को लूट लिया था। आखिरकार सरकार ने आरक्षण की मांग मान ली । लेकिन तबतक कई परिवार तबाह हो चुके थे। आज भी सिसकियां निकल रही हैं उन परिवारों की जिन्होंने अपना सबकुछ खो दिया। गुजरात में भी सरकार अभी खामोश है। जिस तरह का बयान मुख्यमंत्री की तरफ से आया है उसके बाद कई आशंकाएं लोगों के मन में घर कर गई हैं।

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