PATHAN KOT AIRBASE TERROR ATTACK

Pathankot में जल्दबाजी की वजह क्या थी ?
कमी कहां रही और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा ?
वे केवल आतंकी नहीं थे उनकी ट्रेनिंग पाकिस्तानी सेना के स्तर की थी !

पंजाब के Pathankot में आतंकी कब और कैसे दाखिल हुए किसी को इसकी भनक नहीं लगी। एयरबेस में घुसने से एक दिन पहले एसपी को अगवा किया गया। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा अगर खुफिया जानकारी नहीं होती और हमने पहले से तैयारी नहीं की होती तो और बड़ा नुकसान हो सकता था। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा तालमेल में कमी की वजह से हमला हुआ। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा हमें अपने जवानों पर गर्व है। हलांकी मोदी ने गर्व वाला ये बयान तब दिया था जब शाम के वक्त गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था कि Pathankot ऑपरेशन खत्म हो गया। सभी आतंकी मार दिये गए। एयरफोर्स स्टेशन पूरी तरह से सुरक्षित है। लेकिन इस बयान के कुछ घटों बाद ही एयरफोर्स स्टेशन में फायरिंग और धमाके की आवाज सुनाई देने लगी। जिसके बाद पता चला की चुनौती खत्म नहीं हुई है बल्की कई गुना बढ़ गई।

भारत में 30 किलोमीटर भीतर तक कैसे आए आतंकी ?

आतंकियों की तादाद भले ही 5 रही हो लेकिन उनसे लोहा लेने में 4 दिन लग गए और 7 जवान शहीद हो गए। वो भी तब जब आतंकी Pathankot के एयरबेस में घुसे हुए थे। किसी वीराने या पहाड़ी इलाके में नहीं छिपे थे । जहां घेराबंदी करनी मुश्किल होती है। जिस तरह से आतंकी सेना, अर्धसैनिक बलों, वायुसेना के जवानों और एनएसजी कमांडो से मुकाबला करते रहे उससे ये बात तो साफ है कि उन्हें एयरफोर्स स्टेशन के बारे में काफी सधी हुई जानकारी दी गई थी। नक्शे की हर बारीक लकीर को पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं ने उन्हें समझाया था। उसी समझ के आधार पर ये भी अंदाजा लगाया था कि भारत की तरफ से किस तरह से मुकाबला किया जा सकता है। रुक रुक कर गोलीबारी और धमाके किये जाते रहे आतंकियों की तरफ से उससे इतना तो साफ है कि उनकी ट्रेनिंग केवल आतंकी कैंप में नहीं हुई थी। उनकी ट्रेनिंग सैनिक स्तर की थी। यही वजह रही की जिस एयरफोर्स स्टेशन के चप्पे-चप्पे से भारतीय जवान वाकिफ होते हैं उसी स्टेशन में आतंकियों को मारने में 4 दिन लग गए।

ऑपरेशन खत्म करने की जल्दबाजी क्यों थी ?

पहले दिन जब आतंकियों ने हमला किया तो किसी को ये अंदाजा नहीं था कि 80 से ज्यादा घंटों तक मुकाबला करना पड़ेगा। इसी जल्दबाजी में पहले दिन शाम होते- होते ये कह दिया गया की ऑपरेशन खत्म हो गया। सवाल उठता है कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही थी ? इसका सीधा जवाब है कि हाल ही में मोदी पाकिस्तान का दौरा कर आए हैं। सत्ता पक्ष को ये चिंता खाए जा रही थी कि विरोधी उनपर हमला करेंगे। सवाल ये पूछेंगे की आखिर पाकिस्तान ने ऐसा क्या भरोसा दे दिया कि खुद प्रधानमंत्री दोस्ती करने पाकिस्तान पहुंच गए। इसलिए Pathankot हमले से छवि का नुकसान कम से कम हो इसके लिए जरुरी था कि ऑपरेशन जल्दी खत्म किया जाए। लेकिन यहां सरकार की सोच मात खा गई। दूसरा ये कि सरकार ये संदेश देना चाहती थी कि हमारी तैयारी पूरी थी। इसलिए सभी आतंकियों को मार गिराया गया। लेकिन यहां भी सरकार की सोच मार खा गई। क्योंकि आतंकियों से निपटने के लिए न तो कोई तैयारी थी और न ही खुफिया एजेंसियों के बीच कहीं तालमेल नजर आया। अब तो खुद रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर भी मान चुके हैं कि कहीं न कहीं कमी रही है।

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