राज्यसभा में पिछले 15 दिनों में केवल 5 घंटा 10 मिनट हुआ कामकाज

नई दिल्ली:  सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध का सीधा असर संसद की कार्यवाही पर दिखाई दे रहा है। बजट सत्र के दूसरे हिस्से में सदन की कार्यवाही लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। जिसका नतीजा ये है कि पिछले 15 दिनों में राज्यसभा में केवल 310 मिनट ही कामकाज हो सका। जबकि इसे 15 दिनों में औसतन 5400 मिनट चलना चाहिए था। इन 15 दिनों में सदन की कार्यवाही 27 बार स्थगित हो चुकी है।

जिस तरह से राज्यसभा की कार्यवाही लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है उससे ये तो साफ है कि राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू की तरफ से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने की तमाम कोशिश बेकार चली गई। सदन में गतिरोध को देखते हुए वेंकैया नायडू को शुक्रवार को कहना पड़ा राज्य सभा उच्च सदन है, लेकिन यहां सदस्यों का व्यवहार अफसोसजनक है। उन्होंने कहा कि लोग हमसे सवाल पूछ रहे हैं कि क्यों ना पूरे बजट सत्र को स्थगित कर दिया जाए, लेकिन ये समस्या का समाधान नहीं है।

उच्च सदन यानि राज्यसभा की कार्यवाही पिछले 15 दिनों में 5 घंटे 10 मिनट ही चल सकी। जबकि सदन को एक दिन में औसतन 5-6 घंटे चलना चाहिए।

सदन में केवल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर लगातार एक घंटे तक चर्चा हो पाई थी। उस दिन 2 बजे के बाद हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। अबतक राज्य सभा को 27 बार स्थगित किया जा चुका है। जिनमें से 7 बार केवल 2 मिनट में ही कार्यवाही स्थगित करना पड़ा। 15 दिनों में 4 दिन राज्यसभा की कार्यवाही 10 मिनट से भी कम वक्त के लिए चली है।

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