मल की सफाई करने खुद शौचालय की टंकी में उतर गए स्वच्छता सचिव और अधिकारी




नई दिल्ली: पुरानी कहावत है आप दूसरे से जैसे व्यवहार की उम्मीद करते हैं पहले खुद वैसा व्यवहार करें। इसी कहावत को चरितार्थ किया है केंद्रीय स्वच्छता सचिव परमेश्वर अय्यर। ऐसा करनेवाले वो अकेले नहीं थे। उनके साथ साथ तकरीबन एक दर्जन वरिष्ठ नौकरशाह भी शामिल हैं। ये अधिकारी हैदराबाद से तेलंगाना के वारंगल पहुंचे।

इन अधिकारियों ने गंगादेवीपल्ली गांव में 6 शौचालयों के गड्ढों की सफाई की। ऐसा करने का मकसद शौचालय सफाई से जुड़ी शर्मिंदगी को दूर करना था। परमेश्वर अय्यर ने बताया कि इस अभियान से जुड़े अधिकारी अपने साथ एक बोतल कंपोस्ट भी लेकर गए थे। ताकि वो गांववालों को जैविक कंपोस्ट खाद के महत्व के बारे में बता सकें।

अधिकारियों ने केवल शौचालय के गड्ढे की सफाई ही नहीं की बल्कि कंपोस्ट को हाथ में भी उठाया। उस कंपोस्ट का रंग कॉफी पाउडर जैसा था। अय्यर ने बताया दो गड्ढों वाले शौचालय को साफ करना सुरक्षित है इसका कोई नुकसान नहीं होता है। हम लोगों को समझाना चाहते थे कि किस तरह कम लागत में तैयार होनेवाले ट्विन पिट शौचालय ग्रामीण इलाकों के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं।

अय्यर ने आगे बताया ये गड्ढे सालभर या 6 महीने बंद रहते हैं। उन्हें खोलकर उन्हें खाली करना और गड्ढे की सफाई करना लोग शर्मिंदगी का काम समझते हैं। लोग खाद में बदल चुके मल की सफाई करने में हिचकते हैं। हम लोगों को ये बताना चाहते थे कि मल की सफाई की ये प्रक्रिया न केवल बेहद आसान है बल्कि ऐसा करना दिनचर्या के कामों की ही तरह सामान्य भी है। गड्ढे भर जाने के बाद जब उसे कुछ महीनों के लिए बंद कर दिया जाता है तो उसके अंदर का मल पूरी तरह से कंपोस्ट में बदल जाता है।

जिस गंगादेवीपल्ली गांव में स्वच्छता सचिव और अधिकारी मल की सफाई करने गड्ढे में उतरे थे वो देश का ऐसा पहला गांव है जहां 2007 में ही खुले में शौच की आदत से पूरी तरह से मुक्ति पा ली गई थी।

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