पद्मावत Review: खिलजी नहीं, राजपूतों के पराक्रम की कहानी है ‘पद्मावत’

पद्मावत Review: खिलजी नहीं, राजपूतों के पराक्रम की कहानी है ‘पद्मावत’

नई दिल्ली:  फिल्म का नाम- पद्मावत

डायरेक्टर- संजय लीला भंसाली

स्टार कास्ट- दीपिका पादुकोण, रणवीर सिंह, शाहिद कपूर, अदिति राव हैदरी, रजा मुराद, जिम सर्भ

अवधि- 2 घंटा 43 मिनट

सर्टिफिकेट- U/A

रेटिंग- साढ़े चार

संजय लीला भंसाली की फिल्म मद्मावत 25 जनवरी को रिलीज हो रही है। लेकिन इस फिल्म को लेकर विरोध और नफरत की जो चिंगारी करणी सेना की तरफ से लगाई गई है वो शांत नहीं हो रही है। सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिलने के बाद भी फिल्म का विरोध जारी है। फिल्म की कहानी को लेकर विरोध किस हद तक सही है इसका पता तो तब चलेगा जब फिल्म रिलीज होगी और विरोध करनेवाले देखेंगे कि उनका विरोध केवल एक जिद्द थी।

फिल्म की कहानी

भंसाली की फिल्म पद्मावत की कहानी तेरहवीं शताब्दी से शुरु होती है। जिसमें जलालुद्दीन खिलजी (रजा मुराद) अफगानिस्तान में बैठकर दिल्ली जीतने की योजना बना रहा है। तभी उसका भतीजा अलाउद्दीन खिलजी ( रणवीर सिंह) वहां आता है और चाचा की बेटी (अदिति राव हैदरी) के साथ शादी कर लेता है। कहानी आगे बढ़ती है और अपने चाचा को मारकर अलाउद्दीन दिल्ली पर कब्जा कर लेता है।

इसके दूसरी तरफ मेवाड़ के राजा महारावल रतन सिंह (शाहिद कपूर) जब सिंघल देश जाते हैं तो वहां उसकी मुलाकात राजकुमारी पद्मिनी (दीपिका पादुकोण) से होती है। दोनों में प्रेम होता है और रतन सिंह पद्मिनी से शादी कर उसे चित्तौड़ ले आते हैं। किन्हीं वजहों से राज पुरोहित राघव चेतन को देश निकाला दे दिया जाता है। उसी राघव चेतन ने खिलजी के सामने रानी पद्मिनी के सौंदर्य का वर्णन करता है। जिसके बाद खिलजी पद्मिनी के लिए चित्तौड़ पर हमला करने निकलता है।

चित्तौड़ से छल की मदद से उसने रतन सिंह को बंदी बना लेता है और उसे दिल्ली ले आता है। रतन सिंह को छोड़ने के बदले खिलजी रानी पद्मिनी को देखने की शर्त रखता है। इसके बाद घटनाक्रम आगे बढ़ता है और अंत में जीत राजपूतों के पराक्रम की होती है।

इस फिल्म में आर्ट वर्क कमाल का है। इसका थ्री डी इफेक्ट ऐसा एहसास कराता है कि आप खुद रेगिस्तान के बीच में खड़े हों।

फिल्म की पटकथा को काल्पनिक बताया गया है। हलांकी इस कहानी का अंत सभी जानते हैं लेकिन भंसाली ने उसे काफी दिलचस्प तरीके से दिखाया है।

फिल्म में पद्मावती और खिलजी के बीच किसी तरह का ड्रीम सीक्वेंस नहीं है। फिल्म में राजपूत समाज और उसके पराक्रम को ही स्क्रीन पर दिखाने की कोशिश की गई है। उस वक्त की महिलाओं की आत्मसम्मान की दास्तां को भी दिखाया गया है।

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