पद्मावत विरोध: इस Video को देखकर आप सहम जाएंगे, स्कूल बस पर भी कर दिया हमला

नई दिल्ली:  इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या होगी कि महज अपनी जिद के लिए बच्चों को भी निशाना बनाया जा रहा है। अब सवाल सरकार से भी पूछना बेकार है। क्योंकि पद्मावत के नाम पर खिलजी बने हजारों प्रदर्शनकारियों के सामने लाव लश्कर वाली सरकार नतमस्तक हो चुकी है। कैमरे के सामने काफी मुश्किल से जब सूबे के मुखिया अपने सूखे गले से आवाज बाहर निकालते हैं तो वो बस इतना ही कहनी की हिम्मत जुटा पाते हैं कि हम देख रहे हैं।

हम देख रहे हैं …ठीक है सरकार आप देखते रहिये और हम भी देख रहे हैं। हम देख रहे हैं आप कितने भीतर तक हिल चुके हैं…खिलजी तो एक आक्रांता का नाम था लेकिन हम देख रहे हैं आपके सूबे में हजारों खिलजी कोलतार की सड़क पर नफरत कि आग में आपकी तमाम इंतजामों को झुलसा चुकी है…हम देख रहे हैं सरकार आपके उस अज्ञातवास को जिसमें आपकी पूरी व्यवस्था ने खुद को छिपा रखा है…हम देख रहे हैं साहेब व्यवस्था को आक्रांताओं की गुलाम बनते हुए…हम देख रहे हैं हुजूर हारे हुए सुल्तान की सल्तनत में किस तरह से शोले धधक रहे हैं।

गुरुग्राम के इस विडियो को देखिये साहेब और हो सके तो कोई जवाब दीजिये। किस भरोसे पर आप खुद को सत्ता के सिखर पर विराजमान एक मूर्ति से अलग मान सकते हैं। संवेदनाएं रगों में होती तो कभी ये तस्वीर बनती ही नहीं। लेकिन यहां तो पत्थर फेंकने वाले भी संवेदनहीन हो चुके हैं और उन संवेदनहीन सोच वालों को पत्थर फेंकने की आजादी देनेवाली सरकार आधारहीन…विचारहीन और शक्तिहीन।

इस संवेदनहीन और आधारहीन व्यवस्था के बीच बच्चों को इसी तरह से खुद को महफूज रखना है। सहम कर…सिसक कर…शोक मनाकर और चीख कर। जाओ बच्चों मम्मी-पापा के पास जाओ… उनसे सवाल करो कि हम किस व्यवस्था में जी रहे हैं? कभी सूबे के साहेब सामने आ जाएं तो उनसे भी पूछना आपकी सल्तनत इतनी डराती क्यों है…कभी वर्दी वाले अंकल दिख जाएं तो उनसे जरूर पूछना वो तब कहां थे जब बाहर खड़ी भीड़ हमारी बस पर पत्थर फेंक रही थी और हम चीख रहे थे।

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