चिदंबरम बोले नोटबंदी में 16 हजार करोड़ कमाए 21 हजार करोड़ खर्च किये, फायदा कहां हुआ?

नई दिल्ली:  नोटबंदी पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानि RBI ने जो आंकड़ा जारी किया है उसके बाद केंद्र सरकार की नोटबंदी पर सवाल उठने शुरु हो गए हैं। नोटबंदी के तकरीबन 9 महीने बाद RBI ने आंकड़ा जारी किया है। जिसमें बताया गया है कि 30 जून तक कुल 15 लाख 28 हजार करोड़ रुपये के 500 और एक हजार रुपये के पुराने नोट वापस आए हैं। जबकि कुल नोटों की कीमत 15 लाख 44 हजार करोड़ थी। यानि केवल 16 हजार करोड़ रुपये के पुराने नोट वापस नहीं आए हैं। लेकिन इन आंकड़ों में उन नोटों के आंकड़े शामिल नहीं है जो सहकारी बैंक और नेपाल के बैंकों में जमा कराए गए थे।

RBI के इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर सवाल किया है कि नोटबंदी पूरी तरह से नाकाम रही है। इससे कई बेगुनाहों की जानें गई और अर्थव्यवस्था तबाह हो गई। क्या प्रधानमंत्री इसकी जिम्मेदारी लेंगे।

यूपीए सरकार में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम आंकड़ों की बाजीगरी को जानते हैं वो भी वित्तमंत्री रह चुके हैं। चिदंबर ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि नोटबंदी के बाद 15 लाख 44 हजार करोड़ में से सिर्फ 16 हजार करोड़ रुपये नहीं लौटे। नोटबंदी की सिफारिश करने वाले RBI के लिए ये शर्मनाक है। 99 फीसदी नोट कानूनी तरीके से बदल दिये गए। तो क्या नोटबंदी की योजना कालेधन को सफेद करने के लिए थी। रिजर्व बैंक ने 16 हजार करोड़ कमाए लेकिन नए नोट छापने में 21 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिये। ऐसे अर्थशास्त्री को तो नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए।

नोटबंदी को लेकर RBI ने जो आंकड़े पेश किये हैं उसमें सरकार कहीं भी मुनाफे में दिखाई नहीं दे रही है। लेकिन इसके बावजूद सरकार इसे बड़ी कामयाबी मान रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा नोटबंदी से पैसे सर्कुलेशन में आए, करीब दो लाख फर्जी कंपनियां पकड़ी गई, नकद लेन देन कम हुआ है और डिजिटल ट्रांजैक्शन में इजाफा हुआ है, 56 लाख नए करदाता जुड़े हैं।

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