रोहिंग्या मुसलमानों के लिए ओवैसी की हमदर्दी, पीएम मोदी पर ही सवाल उठा दिये

नई दिल्ली:  रोहिंग्या मुसलमानों का मुद्दा चर्चा में है और इसपर सियासी रंग चढ़ गया है। सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है कि रोहिंग्या मुसलमान देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं। और उन्हें यहां शरण नहीं दी जा सकती। जबकि विपक्ष रोहिंग्या मुसलमानों के लिए हमदर्दी के बोल बोल रहे हैं। म्यांमार में जब इन रोहिंग्या मुसलमानों ने अपना स्वतंत्र देश बनाने की कोशिश की तो वहां की सरकार ने इन्हें खदेड़ दिया। जिसके बाद ये भारत की तरफ आने लगे हैं। 40 हजार रोहिंग्या मुसलमान भारत में शरणार्थी बनकर पहुंच भी चुके हैं।

ऐसा नहीं है कि रोहिंग्या मुसलमान केवल शरणार्थी बनकर आए हैं। इनके तार सीधे सीधे पाकिस्तान में पल रहे आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। हाफिज सईद भी इनके लिए हमदर्दी जता रहा है। अगर इन्हें भारत में शरण दी जाती है ये सीधे सीधे देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करना होगा। इन्हीं रोहिंग्या  मुसलमानों के समर्थन में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने सीधे पीएम को ही कटघरे में खड़ा कर दिया।

ओवैसी ने रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर भेजने के प्रस्ताव पर कहा अगर बांग्लादेश से आई लेखिका तस्लीमा नसरीन को अपना सकते हैं तो रोहिंग्या मुसलमानों को क्यों नहीं अपना सकते। पीएम मोदी पर बोलते हुए ओवैसी ने कहा मिस्टर मोदी आपने तस्लीमा के साथ नरमी दिखाकर उन्हें यहां रहने दिया तो फिर रोहिंग्या को क्यों निकाल रहे हैं।

दरअसल रोहिंग्या मुसलमान मूल रूप से बंग्लादेश के रहनेवाले हैं। लेकिन कई सालों पहले वो बंग्लादेश से म्यांमार चले गए। और उसे ही अपना देश मान लिया। लेकिन म्यांमर में इनकी गतिविधि हमेशा संदिग्ध बनी रही। इनकी गतिविधि में हमेशा एक देशद्रोही सोच दिखती रही। जिस वजह से सरकार इन्हें वो दर्जा नहीं दे सकी जो किसी देश की सरकार अपने नागरिकों को देती है। सरकार का ये शक समय के साथ सच भी साबित हुए। जब ये म्यांमार में रहनेवाले ये रोहिंग्या मुसलमान वहां अपना आजाद देश बसाने की सोचने लगे। जिसकी वजह से वहां बहुसंख्यक बौद्ध और रोहिंग्या मुसलमानों के बीच टकराव होने लगा। यही वजह है कि इन्हें वहां से खदेड़ा जा रहा है।

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