लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव करवाना संभव नहीं- चुनाव आयुक्त

नई दिल्ली:एक राष्ट्र-एक चुनाव की संभावनाओं 10 दिन में दूसरी बार चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है।गुरुवार को एक सवाल के जवाब में मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा कि देशभर में लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव नही हो सकता ।इससे पहले 14 अगस्त को रावत ने कहा था कि कानून में बदलाव किए बिना देश में एक साथ चुनाव कराना संभव नहीं है।

एक देश-एक चुनाव कानून बनाने पर रावत ने कहा कि इसके लिए कम से कम 1 साल लगेगा।आम चुनाव की तैयारी 14 महीने पहले से ही चुनाव आयोग द्वारा शुरू कर दी जाती है।और हमारे पास सिर्फ 400 कर्मचारी है।वही चुनाव के दौरान 1.11 करोड़ कर्मचारी तैनात करने होते हैं।इसी के साथ ईवीएम में खराबी के सवाल के सवाल को लेकर रावत ने कहा कि “देशभर में ईवीएम से जुड़ी शिकायतों का प्रतिशत 0.5-0.6% है। जो सामान्य है।”

हाल ही में मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव के साथ-साथ मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम के विधानसभा चुनाव भी हो सकते हैं।जिसके बाद सफाई पेश करते हुए रावत ने कहा था कि यह कई चरणों में ही संभव है। जैसे 11 राज्यों के चुनाव आम चुनाव के साथ कराए जाएं तो किस्तों में ऐसा हो सकता है, बशर्ते जनप्रतिनिधि इसके लिए अपने राज्यों की विधानसभा को भंग करने पर सहमत हो जाएं।” मिजोरम विधानसभा का कार्यकाल 15 दिसंबर को खत्म हो होना है। वहीं, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के कार्यकाल जनवरी-2019 में खत्म हो रहे हैं।

रावत ने एक साथ चुनाव को असंभव बताते हुए इससे पहले कहा था कि “चुनावों के संचालन के लिए 100 फीसदी वीवीपैट की जरूरत होती है और साथ ही अतिरिक्त पुलिस बल और चुनाव अधिकारियों की भी जरूरत होती है।लोकसभा और सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए 24 लाख
ईवीएम की जरूरत होगी। जो आम चुनाव के ईवीएम से दोगुना है।

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