यूपी सरकार ने ठुकराई केंद्र सरकार की मदद

यूपी सरकार ने ठुकराई केंद्र सरकार की मदद

  • केंद्र सरकार के पानी को किया ना
  • यूपी सरकार की ना की वजह सियासी डर तो नहीं!

आज की तारीख में देश में सूखा एक गंभीर समस्या है। महाराष्ट्र से लेकर उत्तर प्रदेश तक के कई इलाके सूखे की चपेट में। लातूर में सूखे की समस्या काफी विकराल हो चुकी थी। जिसके बाद रेल मंत्रालय की तरफ से रेल मार्ग के जरिये इलाके में पानी पहुंचाया गया। ठीक उसी तरह की कोशिश केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश मे भी करना चाहती थी। यूपी के बुंदेलखंड में भी सूखे की वजह से लोग बेहाल हैं। बाल्टी भर पानी के लिए लोगों को घंटे भर का सफर करना पड़ता है।

इसी गंभीर हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने ट्रेन के जरिये बुंदेलखंड के इलाकों में पानी पहुंचाने का प्रस्ताव यूपी सरकार के पास भेजा था। लेकिन यूपी सरकार को केंद्र सरकार की ये मदद मंजूर नहीं थी। नतीजा ये हुआ की राज्य सरकार ने केंद्र के इस प्रस्ताव को नकार दिया। यूपी सरकार के प्रधान सचिव आलोक रंजन का कहना है कि यूपी में लातूर जैसे हालात नहीं है। इसलिए यहां केंद्र सरकार के मदद की जरुरत नहीं है।

लेकिन सच्चाई सरकार के इस दावे से अलग है। अगर एक आंकड़े पर गौर करें तो 2003 से लेकर अबतक वहां 3500 किसानों ने खुदकुशी की है। अगर केवल 2016 की ही बात की जाए तो अबतक 174 किसान खुदकुशी कर चुके हैं। ये आंकड़े हालात के भयावहता को जाहिर करने के लिए काफी हैं। अब सवाल ये उठता है कि आखिर जब हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं तो यूपी सरकार को केंद्र सरकार के मदद पर हामी भरने से परहेज क्यों है ?

इस सवाल का एक जवाब 2017 में होनेवाला विधानसभा चुनाव भी हो सकता है। दरअसल राज्य सरकार नहीं चाहती की बुंदेलखंड में ट्रेन से पानी पहुंचाने के बहाने बीजेपी यूपी की जनता के बीच अपनी पैठ मजबूत करे और जनता की सहानुभूति बीजेपी को मिले। क्योंकि ये एक सत्य है कि आज की तारीख में पानी बुंदेलखंड के लोगों के लिए सबसे बड़ी जरुरत है। और यूपी सरकार उस जरुरत पर अपने पेटेंट का मुहर लगाना चाहती है। हो सकता इसी वजह से राज्य सरकार ने केंद्र सरकार की मदद को ना कह दिया।

अगर यहां ये कहा जाए की महज सियासी नफा नुकसान की वजह से ट्रेन के जरिये बुंदेलखंड में पानी नहीं पहुंचने दिया गया तो भी गलत नहीं होगा। यूपी में अखिलेश यादव के लिए मायावती तो सबसे बड़ी चुनौती हैं ही। लेकिन बीजेपी की तरफ से भी तैयारी की जा रही है। ये भी संभव है कि आनेवाले दिनों में बीजेपी एक मजबूत दावेदार बनकर समाजवादी पार्टी के सामने उभरे। बीजेपी के उसी मंसूबे से राज्य सरकार के भीतर खलबली भी है। और इसी वजह से अखिलेश सरकार ने केंद्र की तरफ से पानी पहुंचाने की पेशकश पर ना कहने में ही अपनी भलाई समझी हो।

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