अमेरिका में इतना जलील कोई देश नहीं हुआ जितना अब Pakistan हुआ

अपनी हरकतों की वजह से पाकिस्तन अक्सर खरी खोटी सुनता है। इतने के बाद भी अमेरिका की तरफ से उसे आर्थिक मदद दी जाती रही है। लेकिन अब अमेरिकी सांसदों को भी लगने लगा है कि Pakistan उसे बेवकूफ बना रहा है। अमेरिकी सांसदों और वहां के विशेषज्ञों ने Pakistan को मिलनेवाली मदद में कटौती करने की जोरशोर से वकालत की है। अमेरिकी सांसदों ने कहा कि Pakistan की मदद में कटौती होनी चाहिए और इसे आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के तौर पर लिस्टेड करने की वकालत की। सभी के कहने का मतलब ये था कि Pakistan लगातार चीजों को तोड़ मरोड़कर पेश करता रहा है और अमेरिका को मूर्ख समझ रखा है। सदन की विदेश मामलों की समिति की एशिया और प्रशांत उपसमिति के अध्यक्ष मैट सैल्मन ने कहा ‘वे हमें मूर्ख बना रहे हैं। वे हमें मूर्ख समझते हैं। यह माफिया को धन देने की तरह है।‘
कुल मिलाकर सांसदों का जोर इस बात पर था कि Pakistan को मिल रही आर्थिक मदद में कटौती हो और उसे आतंकवाद को स्पॉन्सर करनेवाले देश की सूची में शामिल किया जाए ।
जाल्मे खलीलजाद ने कहा कि ‘यदि मैं गैरराजनयिक शब्द का इस्तेमाल कर सकता हूं तो हम बहुत भोले- भाले रहे हैं। सैल्मन ने खलील जाद की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा ‘भोले भाले मूर्ख। अधिकतर अमेरिकी यह देख सकते हैं और हमारे तथाकथित नेताओं को यह बात अभी तक समझ नहीं आई।‘
खलीलजाद ने बुश के शासनकाल के वक्त अफगानिस्तान में अमेरिकी राजदूत, संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि की भूमिका निभा चुके हैं। उन्होंने कहा ‘Pakistan बहुत चालाकी से चीजों को तोड़ मरोड़कर पेश करके हमारा इस्तेमाल करता रहा है।‘
एक पूर्व शीर्ष अमेरिकी राजनयिक का कहना है कि ‘Pakistan के साथ संबंधों का मेरा अनुभव यह है कि वो आपको तभी कुछ देंगे, जब उन्हें यह पता होगा कि उन्हें कुछ मिलने वाला है।‘
रोहराबाचर ने कहा ‘Pakistan को मदद देना मूर्खतापूर्ण है। यह भ्रष्ट दमनकारी शासन बलूचिस्तान के लोगों को मार रहा है। बलूचिस्तान के लोगों को यह समझना चाहिए कि अमेरिका एक भ्रष्ट, आतंकवादी समर्थन शासन से उनकी स्वतंत्रता और स्वाधीनता के लिए उनके साथ है। ऐसी ही स्थिति सिंधियों के साथ है। ऐसे ही हालात Pakistan में दूसरे समूहों के साथ हैं। यदि कोई शासन लोगों की जान लेता है, दमन करता है और भ्रष्ट है इसके बावजूद हम उन्हें किसी प्रकार का समर्थन देना जारी रखते हैं तो ये वाकई बेतुका है।‘

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