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मोदी सरकार खत्म करेगी 92 साल पुरानी प्रथा, 2017 से नहीं पेश होगा रेल बजट!

मोदी सरकार खत्म करेगी 92 साल पुरानी प्रथा, 2017 से नहीं पेश होगा रेल बजट!

दिल्ली: भारतीय रेल को कितना पैसा दिया जाए और किस मद में कितना पैसा खर्च किया जाए। रेलवे ने कितना काम किया कितना काम बकाया रह गया। इन सब चीजों की चिंता अब वित्त मंत्रालय के जिम्मे आनेवाली है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि 2017 से रेल बजट अलग से पेश नहीं किया जाएगा। बल्कि ये आम बजट का ही हिस्सा बन जाएगा। कहने का मतलब ये है कि अब आम बजट के साथ ही रेल बजट को पेश किया जाएगा। और जिस तरह से आम बजट में अलग-अलग मंत्रालयों के बारे में पैसों का आवंटन होता है उसी तरह से अब रेल मंत्रालय के लिए भी पैसों का आवंटन होगा। इसके साथ ही रेलवे के काम और खर्चे पर अब वित्त मंत्रालय की भी नजर रहेगी।

जानकारी के मुताबिक वित्त मंत्रालय भी रेल बजट को आम बजट में शामिल करने के लिए राजी हो गया है। इसपर फैसला लेने के लिए वित्त मंत्रालय की तरफ से पांच सदस्यों की टीम बनाई गई थी। उन्हीं के रिपोर्ट के आधार पर ये फैसला लिया गया। रेल मंत्री सुरेश प्रभू ने भी राज्य सभा में कहा था कि उन्होंने वित्त मंत्रालय और वित्त मंत्री से रेल बजट अगल से पेश करने की प्रथा खत्म करने को कहा है। इससे आर्थिक फायदा भी होगा।

रेल बजट अलग से पेश करने की प्रथा अंग्रेजों के समय से ही चली आ रही थी। 1924 से चली आ रही 92 साल पुरानी प्रथा 2017 में खत्म होने वाली है।

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