नीतीश-लालू के टकराव में सोनिया ने दिया दखल, महागठबंधन बचाने की आखिरी कोशिश

नई दिल्ली:  बिहार में तेजस्वी के इस्तीफे को लेकर नीतीश और लालू की पार्टी जेडीयू और आरजेडी के बीच खिंची तलवार की धार कुंद होने की बजाय तेज होती जा रही है। अब दोनों तरफ से साफतौर पर कुर्बानी की बात होने लगी है। इस टकराव और तल्खी को देखते हुए अब खुद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सीधे तौर नीतीश और लालू के बीच सुलह कराने के लिए दखल दिया है।

शुक्रवार को सोनिया गांधी ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार और आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव से फोन पर बात की। बताया जा रहा है इस बातचीत में सोनिया ने अपने दोनों सहयोगी दलों से हालात को जिम्मेदारी के साथ संभालने की बात कही। सोनिया ने दोनों नेताओं से गठबंधन की मजबूती बनाए रखने की बात भी कही। सोनिया की इस बात का कितना असर होता है ये भी एक दो दिन में पता चल जाएगा।

लेकिन फिलहाल जेडीयू और आरजेडी के नेताओं की तरफ से आ रहे बयानों में तल्खी बनी हुई है। गुरुवार को आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने यहां तक कह दिया कि उनके पास 80 विधायक हैं और महागठबंधन में वही होगा जो वो चाहेंगे। इसके जवाब में जेडीयू की तरफ से शुक्रवार को अजय आलोक ने कहा उन्हें पांच मिनट लगेंगे वो सरकार छोड़ देंगे। आलोक ने आगे कहा वो सत्ता सुख भोगने नहीं आए हैं। और ना ही सत्ता के लिए वो सिद्धांत के साथ समझौता करेंगे।

इधर आरजेडी ने साफ कर दिया है कि तेजस्वी इस्तीफा नहीं देंगे। अगर उन्हें बर्खास्त किया जाता है या जबरन उनका इस्तीफा लिया जाता है तो आरजेडी के सभी मंत्री इस्तीफा दे देंगे और सरकार को बाहर से समर्थन देंगे। ऐसा शायद इसलिए सोचा गया है ताकि नीतीश समर्थन जुटाने के लिए बीजेपी के साथ न चले जाएं। आरजेडी की इस रणनीति के जवाब में जेडीयू ने भी अपनी रणनीति तैयार की है। बताया जा रहा है कि अगर तेजस्वी इस्तीफा नहीं देते हैं तो फिर नीतीश खुद इस्तीफा दे देंगे।

जेडीयू के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी ने कहा आरजेडी के नेता जो भी बयान दे रहे हैं वो घमंड और अकड़ के साथ दे रहे हैं। उन्होंने कहा नीतीश कुमार ने कभी भ्रष्टाचार के मुदेद पर समझौता नहीं किया है, हमलोग भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा तीनों पार्टियों ने मिलकर नीतीश को महागठबंधन का नेता माना है। इसलिए उनके सवालों पर भी ध्यान देना जरुरी है।

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