निर्माला के हाथ रक्षा मंत्रालय से BJP को बड़ी जीत की उम्मीद है, इसे भी समझिये

नई दिल्ली:  मोदी सरकार के सबसे बड़ी कैबिनेट फेरबदल में चौंकानेवाला नाम रहा निर्मला सीतारमण का। निर्मला सीतारमण को रक्षा मंत्री बनाया जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था। निर्मला इससे पहले वाणिज्य मंत्रालय में राज्य मंत्री थीं। बतौर राज्य मंत्री उनकी कोई खास उपलब्धि रही नहीं या दिखाई नहीं दे रही है जिसे देखते हुए कहा जा सकता है कि वो उस प्रमोशन की हकदार थीं।

दरअसल निर्मला को रक्षा मंत्री बनाकर मोदी सरकार और बीजेपी ने एक वैक्यूम को भरने की कोशिश की है। इस वैक्यूम का निर्माण वैंकेया नायडू के उप राष्ट्रपति बनने के बाद बना था। क्योंकि कैबिनट में ऐसा कोई चेहरा बचा नहीं था जिसे सामने रखकर बीजेपी ये कह सके कि उसकी सरकार में दक्षिण भारत की बराबर भागीदारी है। हलांकि वैंकेया और निर्मला की कोई तुलना नहीं हो सकती है। लेकिन दोनों में जो एक बात समान है वो है सभी दलों में स्वीकार्य।

जिस तरह से वैंकेया नायडू दक्षिण भारत के सभी दलों में स्वीकार्य थे उसी तरह से निर्मला सीतारमन की भी दक्षिण भारत की पार्टियों पर पकड़ है। और वक्त पड़ने पर वो पार्टी के लिए कोई बड़ा काम भी कर सकती हैं। उन्हें हिंदी की भी समझ है। चुकी वो तमिलनाडु से आती हैँ और वहां पर फिलहाल तो चुनाव नहीं है लेकिन पड़ोसी राज्य कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में 2018 में चुनाव होना है। उस चुनाव में दक्षिण विजय में पार्टी के लिए निर्मला रक्षा मंत्री बनाना लाभदायक साबित हो सकता है।

निर्मला को रक्षा मंत्री बनाकर मोदी ने ये संदेश देने की भी कोशिश की है कि उनकी सरकार महिलाओं को काफी अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी देने में नहीं हिचकती। और उन्हें भी सरकार में बराबर का मौका देती है। हलांकि विदेश मंत्री भी महिला हैं। शुरुआत में शिक्षा मंत्रालय भी महिला के हाथ में ही थी। सुमित्रा महाजन को लोकसभा अध्यक्ष बनाकर पार्टी ने महिलाओं को सरकार में भागीदार बनाने के अपने दावे और वादे का प्रचार कर सकती है।

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