सेल्फी में ही वक्त निकल जाएगा तो मास्टर साहब पढ़ाएंगे कब सरकार?

मुंबई: महाराष्ट्र में सराकर का एक फरमान आया है कि सभी स्कूलों के शिक्षक छात्रों के साथ सेल्फी लेंगे। फिस उस सेल्फी में शामिल बच्चों का आधार नंबर लिखेंगे उसके बाद उस सेल्फी को सरकार की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। इसके बाद क्लास में पढ़ाई शुरु करेंगे। शिक्षक सरकार के इस आदेश के बाद अपमानित महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतना वक्त सेल्फी लेने में ही निकल जाएगा तो बच्चों को पढ़ाएंगे कब।

कुछ दिनों पहले ही शिक्षा विभाग ने शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमीट्रिक अटेंडेंस लेने का आदेश दिया था। ये काम अबतक अधूरा है। इतने में सरकार ने दूसरा सीआर निकाल दिया सेल्फी वाला। इसमें ये कहा गया है कि क्लास टीचर 10-10 बच्चों का ग्रुप बनाएंगे। फिर उनके साथ सेल्फी लेंगे और उसे विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करेंगे। सरकार का नया आदेश जनवरी 2017 से लागू होना है।

शिक्षक सरकार के इस नए सीआर का विरोध कर रहे हैं। इसके पीछे कुछ बुनियादी परेशानी बताई है शिक्षकों ने। उनका कहना है कि इसमें काफी वक्त बर्बाद हो जाएगा और बच्चों को पढ़ाने का कम वक्त मिलेगा। दूसरा सेल्फी साफ आ सके इसके लिए महंगा मोबाइल फोन खरीदना पड़ेगा। यानि इससे शिक्षकों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। तीसरा ये कि ग्रामीण इलाकों में जो स्कूल हैं वहां नेटवर्क की समस्या है। शिक्षकों का वक्त पहले सेल्फी लेने और उसके बाद नेटवर्क तलाश करने में ही निकल जाएगा।

शिक्षकों के विरोध के बीच ये मुद्दा राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा है कि पहले सीएम देवेंद्र फडणवीस अपने गायब मंत्रियों के साथ सेल्फी निकाले ताकि राज्य की जनता को पता चले कि ये भी मंत्री हैं। उन्होंने कहा यदि मुख्यमंत्री मंत्रालय में उपस्थित रहनेवाले मंत्रियों के साथ सेल्फी निकालकर पोस्ट करते तो जनता को पता चलता कि कौन-कौन मंत्री मंत्रालय में नहीं आते। कम से कम सेल्फी के डर से मंत्री मंत्रालय आएंगे।

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